शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' का किया शंखनाद
बोले—धर्मयुद्ध पूर्णतः अहिंसक और वैचारिक, हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद
वाराणसी, 01 मार्च (हि.स.)। पॉक्सो एक्ट में दर्ज मुकदमे में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को धर्मनगरी काशी से ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' का शंखनाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूर्णतः अहिंसक और वैचारिक होगा तथा इसका उद्देश्य बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध और गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित किए जाने की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश सरकार को उनकी पंचसूत्रीय मांगों पर निर्णय लेने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसमें से 30 दिन बीत चुके हैं। अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि शेष दिनों में सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संबंधित राजनीतिक दल और उनके नेतृत्व की होगी। शंकराचार्य ने कहा, यह ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ पूरी तरह शांतिपूर्ण और वैचारिक होगा। हमारा अस्त्र ‘शास्त्र और संवाद’ है, हिंसा नहीं। हम सत्ता को उसकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी का स्मरण कराने के लिए शांतिपूर्ण यात्रा के माध्यम से लखनऊ प्रस्थान करेंगे।
—कार्यक्रमों की रूपरेखा
शंकराचार्य ने 06 मार्च से 11 मार्च तक आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की घोषणा की।
कार्यक्रम के अनुसार 06 मार्च: वाराणसी के शंकराचार्य घाट पर ‘गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर गंगापूजन के साथ धर्मयुद्ध का संकल्प।
07 मार्च: प्रातः 8:30 बजे केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ से प्रस्थान। संकटमोचन हनुमान मंदिर में हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा व बजरंग बाण पाठ के उपरांत यात्रा आरंभ। उसी दिन जौनपुर, सुल्तानपुर और रायबरेली में सभाएं व रात्रि विश्राम।
08 मार्च: मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज व उन्नाव में सभाएं व रात्रि विश्राम।
09 मार्च: उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य में सभाएं व रात्रि विश्राम।
10 मार्च: नैमिषारण्य से प्रस्थान कर सिधौली व इटौंजा होते हुए लखनऊ सीमा में प्रवेश और रात्रि विश्राम। 11 मार्च: दोपहर 2:15 से 5:00 बजे तक लखनऊ स्थित कांशीराम स्मृति उपवन (पासी किला चौराहा, आशियाना) में विद्वानों की सभा।
शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश सरकार, सत्ताधारी दल और जिम्मेदार नेताओं की चुप्पी उनकी मांगों के प्रति उदासीनता को दर्शाती है। उन्होंने आशा जताई कि शेष दिनों में सरकार सकारात्मक पहल करेगी, अन्यथा आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

