वाराणसी में ज्योतिर्मठ के प्रथम शंकराचार्य तोटकाचार्य का मना पट्टाभिषेक दिवस
—केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में 'तोटकाष्टकम्' का सामूहिक सस्वर पाठ, विशेष पूजन
वाराणसी, 3 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक नगरी वाराणसी के केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में शनिवार को आदि गुरु शंकराचार्य के परम शिष्य एवं ज्योतिर्मठ के प्रथम आचार्य श्री तोटकाचार्य का पट्टाभिषेक दिवस श्रद्धा, भक्ति और वैदिक गरिमा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मठ परिसर में पूरे दिन विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रातःकाल भगवान श्री तोटकाचार्य की प्रतिमा का विधिवत विशेष पूजन किया गया। इसके पश्चात मठ के शिष्यों द्वारा ‘तोटकाष्टकम्’ का सामूहिक सस्वर पाठ किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। मठ के प्रभारी परमात्मानन्द ने इस अवसर पर कहा कि आचार्य गिरि (तोटकाचार्य) ने अपनी अनन्य गुरु-भक्ति के बल पर ‘तोटक’ छंद में स्तुति कर अद्वैत वेदांत को सरल एवं सुलभ रूप प्रदान किया। ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने सहारनपुर स्थित शाकम्भरी शक्ति पीठ में आराधना के उपरांत वर्चुअल माध्यम से तोटकाचार्य को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा, समर्पण और गुरु-निष्ठा की पराकाष्ठा का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सामान्य धारणा है कि तोटकाचार्य अल्पज्ञानी थे, जबकि वास्तविकता यह है कि वे अपने ज्ञान को प्रकट नहीं करते थे। आदि शंकराचार्य के आदेश पर उन्होंने न केवल तोटक छंद में स्तुति की, बल्कि ‘श्रुतिसारसमुद्धरण’ जैसे ग्रंथ की रचना कर संपूर्ण वेदांत ज्ञान का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने सिद्ध किया कि गुरु-कृपा से सेवा करते हुए भी उच्चतम ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर मठ में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं एवं शिष्यों ने प्रसाद ग्रहण किया। सायंकाल विशेष आरती के साथ उत्सव का समापन हुआ। कार्यक्रम में दंडी स्वामी दुर्गानन्द सरस्वती, साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, ब्रह्मचारी परमात्मानन्द, मठ प्रबंधक कृष्ण कुमार द्विवेदी, हजारी कीर्ति नारायण, संजय पाण्डेय सहित अनेक संत-महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

