रन फॉर स्वदेशी में स्वदेशी जागरण मंच के साथ विद्यार्थियों ने की भागीदारी

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रन फॉर स्वदेशी में स्वदेशी जागरण मंच के साथ विद्यार्थियों ने की भागीदारी


रन फॉर स्वदेशी में स्वदेशी जागरण मंच के साथ विद्यार्थियों ने की भागीदारी


स्वामी विवेकानंद की जयंती पर विविध कार्यक्रम,यूथ आउटरीच प्रोग्राम

वाराणसी,12 जनवरी (हि.स.)। स्वामी विवेकानंद की जयंती 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के अवसर पर सोमवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में जगह-जगह गोष्ठी और “रन फॉर स्वदेशी” का आयोजन किया गया।

'राष्ट्रीय युवा दिवस' पर स्वदेशी जागरण मंच काशी महानगर की ओर से “रन फॉर स्वदेशी” लंका स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)के सिंह द्वार से स्वामी विवेकानंद प्रतिमा आईपी विजया चौराहा तक निकाली गई। स्वदेशी संकल्प दौड़ का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख मनोज ने किया।

संकल्प दौड़ में काशी महानगर के कार्यकर्ताओं के अलावा आदर्श शिक्षा मंदिर, गोपी राधा बालिका इंटर कॉलेज, सनातन धर्म इंटर कॉलेज, इंटरनेशन हिन्दू स्कूल नगवां, नवनीता कुंवर पब्लिक स्कूल सुसवाही, हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज सहित 12 विद्यालय एवं महाविद्यालय की भागीदारी रही। महानगर संयोजिका कविता मालवीय के नेतृत्व में निकली संकल्प दौड़ में युवा विमर्श एवं लघु उद्योग भारती के अलावा मजदूर संघ के राकेश पांडेय भी मौजूद रहे।

महानगर संयोजिका ने बताया कि राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के लिए गहरे राष्ट्रीय और सभ्यतागत महत्व का दिन है। यह उन विचारों का पुन: स्मरण है, जो भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। स्वामी विवेकानंद युवाओं को राष्ट्र के पुनर्निमाण की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। उनका प्रेरक आह्वान उठो, जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए, आज भी भारतीय युवाओं में आत्मविश्वास, साहस और स्वबोध का संचार करता है।

इसी क्रम में बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर बरकछा में राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर मालवीय पार्क में “रन फॉर स्वदेशी” नाम से एक यूथ आउटरीच प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. बी.एम.एन कुमार और संकाय प्रमुख पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय प्रो. अमितराज गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में छात्रों के वर्ग में प्रथम पुरस्कार ऋषिकेश यादव बी. काम. ऑनर्स, द्वितीय पुरस्कार अभिषेक सिंह बीकाम ऑनर्स, तृतीय पुरस्कार अक्षांश कन्नौजिया, छात्राओं के वर्ग में प्रथम पुरस्कार टेजरिंग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय, द्वितीय पुरस्कार आकांक्षा सोनकर बीकाम ऑनर्स, तृतीय पुरस्कार वैष्णवी को मिला।

राष्ट्रीय युवा दिवस' के अवसर पर ही काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र एवं अन्तर सांस्कृतिक अध्यापन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में 'आज का समय और स्वामी विवेकानन्द' विषयक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। विशिष्ट व्याख्यान में विचारक एवं आलोचक प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि ‘स्वामी विवेकानंद पर चर्चा करने का अवसर मिलना मेरे लिए सदैव सुखकर होता है। शिकागो में स्वामी विवेकानन्द का बोलना एक रूपक की तरह था। सैकड़ों वर्षों बाद किसी सन्यासी ने समुद्रपार की यात्रा की और विश्व मंच पर भारतीय ज्ञान और अध्यात्म चेतना का परचम फहराया था। इमर्सन, थोरो और वाल्ड व्हीटमेन के प्रयास से अमेरिका और यूरोप में भारतीय ज्ञान के प्रति सम्मान बढ़ा था और इस ज्ञान परंपरा की गहराई से स्वामी विवेकानन्द ने सभी को परिचित कराया था। स्वामी जी ने भारतीय युवाओं को विदेश यात्रा के लिए प्रोत्साहित किया और पश्चिम की विज्ञान और व्यापार की शक्ति को समझने के लिए प्रेरित किया। स्वामी विवेकानंद ने यूरोप और अमेरिका के स्त्री स्वाबलम्वन की अत्यधिक प्रशंसा की। स्वामी जी ने कहा कि यूरोप और अमेरिका को भीतर से बदलने के लिए वेदान्त के संदेश का अनुपालन करना चाहिए। उन्होंने पश्चिम की महानता और उनके संकट को भी बहुत करीब से देखा और उसकी तर्कपरक समीक्षा की थी।

सिस्टर निवेदिता का कहना था कि स्वामी विवेकानन्द का निर्माण तीन चीजों से हुआ था। इनमें पारंपरिक अकादमिक ज्ञान, स्वामी रामकृष्ण का साथ और वर्षों तक भारत का परिभ्रमण। स्वामी जी ने भारत के लोगों का आत्मविश्वास और आत्मचेतना को जागृत करने का महती कार्य किया था। केन्द्र के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन अन्तर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. राजकुमार अैर संचालन डॉ. धर्मजंग ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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