अखंड भारत एक सभ्यतागत स्मृति, सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना का विचार : प्रो. जयप्रकाश लाल
वाराणसी, 14 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के काशी विभाग संघचालक प्रोफेसर जयप्रकाश लाल ने कहा कि अखंड भारत एक सभ्यतागत स्मृति, सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना का विचार है। अखंड भारत का अर्थ केवल मानचित्र पर किसी भूभाग को जोड़ना नहीं है । भारत दुनिया के सभी प्रकार के श्रेष्ठ ज्ञान को अपने में समाहित करने की क्षमता रखता है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय रांची झारखंड के कुलाधिपति व विभाग संघचालक प्रो. लाल शुक्रवार शाम काशी दक्षिण भाग के विद्यार्थी कार्य विभाग की ओर से बीएचयू के आयुर्वेद संकाय स्थित पुनर्वसु सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन प्रथम विभाजन नहीं था। भारत अब तक कुल 27 बार विभाजित किया गया है। गुप्त वंश का शासन समाप्त होने के बाद ईरान ,थाईलैंड, कंबोडिया ,इंडोनेशिया, मलेशिया भारत से अलग हुए। इसके बाद अफगानिस्तान 1876 में ,नेपाल 1904 में, भूटान 1906 में ,तिब्बत 1914 में ,म्यांमार 1937 में एवं श्रीलंका 1935 में भारत की मुख्य भूमि से अलग हुए।
उन्होंने विभाजन के कारण को स्पष्ट करते हुए बताया कि अंग्रेजों के आने के पूर्व का विभाजन भारतीय जनमानस का स्व केंद्रित था । भारत में अब तक का सबसे बड़ा विभाजन 14 अगस्त 1947 को हुआ जब पूर्व में वर्तमान का बांग्लादेश एवं पश्चिम में पाकिस्तान का जन्म हुआ । इस विभाजन के फलस्वरुप 1.4 करोड़ लोगो का विस्थापन हुआ, लाखों लोग मारे गए।
विभाजन की इस विभीषिका के कारण वर्तमान भारत सरकार ने इस दिवस को विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है । उन्होंने भारत के स्वतंत्रता के समय उपस्थित परिस्थितियों की चर्चा करते हुए बताया कि वास्तव में भारत को स्वतंत्रता 1948 तक दी जानी थी। परंतु मुस्लिम लीग की राजनीति, सांप्रदायिक हिंसा, कमजोर नेतृत्व एवं प्रशासनिक विफलता के कारण जल्दीबाजी में 14 एवं 15 अगस्त की मध्य रात्रि स्वतंत्रता तय की गई।
1947 के विभाजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि शरणार्थियों की सहायता, भोजन ,चिकित्सा और सुरक्षा जैसे कार्यों में संघ के स्वयंसेवकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। 3000 से अधिक राहत शिविर चलाए गए 14 सितंबर 1947 को दिल्ली की वाल्मीकि बस्ती में महात्मा गांधी ने लगभग 500 स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का प्रारंभ काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुआ। इसके पश्चात काशी दक्षिण भाग के विद्यार्थी कार्य प्रमुख गौरव एवं जयप्रकाश लाल ने महामना पं. मदन मोहन मालवीय की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं भारत माता, डॉ केशव बलिराम हेडगेवार और श्री गुरु जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के अंत में अखंड भारत के मानचित्र पर दीप प्रज्वलन किया गया, समापन वंदे मातरम गायन से हुआ। कार्यक्रम में आयुर्वेद संकाय के पूर्व संकाय प्रमुख प्रोफेसर पीके गोस्वामी, इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक वनमाली सिंह, हिंदी विभाग के प्रोफेसर अशोक ज्योति, भाग प्रचारक आदर्श भी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

