श्री काशी विश्वनाथ के गौने का साक्षी बनी काशी, बाबा के विग्रह पर गुलाल चढ़ाने की होड़
—पालकी यात्रा में शामिल होकर शिवभक्त आह्लादित, राजसी ठाटबाट के साथ दुल्हा बने महादेव
वाराणसी, 27 फरवरी (हि.स.)। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (रंगभरी एकादशी) पर शुक्रवार शाम काशीपुराधिश्वर बाबा विश्वनाथ के गौना उत्सव का साक्षी बनने के लिए शिवभक्तों के साथ शहर में आए देशी-विदेशी सैलानियों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत स्मृतिशेष स्व. कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास 'गौरी सदनिका' से ज्ञानवापी क्रासिंग स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार तक श्रद्धालु शिव परिवार के दर्शन के लिए लालायित दिखे। राजसी ठाटबाट के साथ दूल्हे के रूप में सजे रजत पालकी पर सवार बाबा विश्वनाथ और दुल्हन जगत जननी गौरा, उनकी गोद में बैठे प्रथम पूज्य भगवान गणेश के रजत विग्रह की झलक पाकर श्रद्धालु हर—हर महादेव का उद्घोष करते रहे।
इसके पहले गुजराती शैली के अंगरखु और काठियावाड़ी कुर्ता,केरल की पारंपरिक धोती (मुंडू) पहने बाबा के विग्रह को राजसी अंदाज में रजत पालकी में विराजमान कराया गया। उनके बगल में गुजराती बंधानी/पटोला और दक्षिण भारत की कांजीवरम साड़ी पहने माता गौरा और भगवान गणेश को उनके गोद में बैठाकर पालकी में बैठाया गया। पालकी की विशेष पूजा मंहत परिवार के प्रतिनिधि महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने की। शाम पांच बजकर नौ मिनट पर जैसे ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से अर्चकों का दल महंत आवास की गली में पहुंचा समूचा वातावरण हर—हर महादेव के घोष से गुंजायमान हो उठा। कपूर से महाआरती के बाद पं. वाचस्पति तिवारी ने दोनों हाथों में जलती मोबत्तियां लेकर बाबा की पालकी उठाने का संकेत किया। बाबा की पालकी महंत परिवार के सदस्यों द्वारा उठाते ही चारों तरफ से अबीर और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाई जाने लगीं। शंखनाद के बीच आगे-आगे डमरूदल और पीछे-पीछे बाबा की पालकी काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ी। टेढ़ी नीम में नौ ग्रहेश्वर महादेव मंदिर से आगे बढ़ते ही विष्णु कसेरा के आवास से 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कराई गई। पालकी सवार शिव परिवार के विग्रह का स्पर्श कर उन पर गुलाल बरसाने की लोगों में होड़ मच गई। इस दौरान महिलाएं छतों, बारजों से गुलाब की पंखुडि़यां बाबा के डोली पर बरसा रही थीं।
बाबा के पालकी पर इस कदर गुलाल की बौछार हुयी कि लोगों को पहचानना मुश्किल हो गया। गली में कतारबद्ध खड़े भक्तों ने पालकी पर दोनों हाथों से इस कदर अबीर-गुलाल उड़ेला कि जमीन से आसमान तक गुलाल ही गुलाल दिखायी दे रहा था। महंत के आवास, गलियों से लेकर मंदिर के स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन, गर्भगृह तक लोगों के चेहरे लाल, गुलाबी हो गए। पूरे रेड जोन में गुलाल की मोटी परत जम गई। इसी के साथ काशीवासियों ने बाबा से होली पर्व पर रंग खेलने और हंसी ठिठोली की अनुमति भी प्रतीक रूप से ले ली। बाबा और मां पार्वती की चल प्रतिमाएं टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से निकाल कर साक्षी विनायक और ढुंढिराज विनायक होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंची। इसके पूर्व भोर में बाबा की चल प्रतिमा को पंचगव्य स्नान कराया गया। सुबह 6.30 पर षोडशोपचार पूजन के बाद लोकाचार और महाआरती हुई। इसके बाद पूर्व महंत के घर में शिव-पार्वती की चल प्रतिमाओं का दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। इसी के साथ बाबा को अबीर-गुलाल अर्पित कर सुख, शांति, समृद्धि का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की लाइन लगने लगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

