काशी विश्वनाथ धाम से भेजे गए गुलाल से मथुरा में भगवान श्री लड्डू गोपाल खेलेंगे होली
—काशी विश्वनाथ धाम में रंगभरी एकादशी महोत्सव – 2026 की शुरूआत सोमवासरीय रुद्राभिषेक से
विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी
वाराणसी, 21 फरवरी (हि.स.)। श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा श्री विश्वेश्वर के गौना उत्सव (रंगभरी एकादशी) की तैयारियां चल रही है। 27 फरवरी रंगभरी एकादशी को धाम में प्रातःकाल संकल्पित सोमवासरीय रुद्राभिषेक का आयोजन विधि-विधानपूर्वक संपन्न होगा।
रुद्राभिषेक के उपरांत होली पर्व के दृष्टिगत भगवान श्री विश्वेश्वर के दरबार से श्री कृष्ण जन्मस्थान, मथुरा स्थित भगवान श्री लड्डू गोपाल के लिए पारंपरिक उपहार एवं अबीर-गुलाल ससम्मान प्रेषित किए जाएंगे। यह आयोजन काशी एवं ब्रज की सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक एकता का प्रतीक होगा। शनिवार की शाम यह जानकारी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से दी गई।
बताया गया कि रंगभरी एकादशी और गौना उत्सव के पहले मंदिर न्यास की पंचबदन प्रतिमा के साथ माता पार्वती एवं बाल स्वरूप भगवान श्री गणेश जी का श्रृंगार कर मंदिर परिसर में श्री लक्ष्मी नारायण जी के विग्रह के समीप नव-निर्मित कक्ष में वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विधिवत् प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके बाद रंगभरी एकादशी पर्व के शुभ अवसर पर प्रातःकाल श्री कृष्ण जन्मभूमि द्वारा भगवान् श्री विश्वेश्वर के लिए भेजे गए उपहारों को समारोहपूर्वक स्वीकार किया जाएगा। इस पावन अवसर पर ब्रज के रसियारे कलाकारों के पारंपरिक रास एवं होली रसिया की मनोहारी प्रस्तुति धाम स्थित सांस्कृतिक मंच (शिवार्चनम् मंच) पर की जाएगी। परंपरानुसार बाबा की चल प्रतिमा का आगमन हर्षोल्लास के साथ धाम में होगा, जिसके उपरांत गर्भगृह में प्रतिमा को विराजमान किया जाएगा।
——श्री काशी विश्वनाथ धाम के गर्भगृह में जौ अर्पित
श्री काशी विश्वनाथ धाम में शनिवार को बाबा श्री विश्वेश्वर के पावन ज्योर्तिलिंग पर विधिवत पूजन-अर्चन के उपरांत जौ अर्पित किया गया। मंदिर न्यास के अनुसार माघ मेला सम्पन्न होने के उपरांत संगम तट स्थित मार्ग, प्रयागराज में स्थापित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के शिविर में परंपरानुसार जौ (यव) का रोपण किया गया था। यह जौ विशेष रूप से श्री कुंभेश्वर महादेव के सान्निध्य में श्रद्धा के साथ उगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ मास में संगम तट पर उगाया गया जौ समृद्धि, शुभता और नवचेतना का प्रतीक माना जाता है। इसे विधिवत पूजन-अर्चन के उपरांत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अर्पित किया गया।
बताया गया कि माघ मेला अवधि में स्थापित शिविर में प्रतिदिन वैदिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक एवं सत्संग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जौ अर्पण के साथ ही माघ मेला से जुड़ी यह विशेष धार्मिक परंपरा विधिवत सम्पन्न हुई। मंदिर न्यास ने इसे काशी और प्रयागराज की साझा आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। इस दौरान रमेश चंद ओझा, कुलदीप नारायण पांडेय, मनोज उपाध्याय, पवन प्रकाश पाठक (उप जिलाधिकारी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर) आदि भी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

