रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला की आज शुरुआत होगी, पहले दिन रावण जन्म और क्षीर सागर की भव्य झांकी सजेगी

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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला की आज शुरुआत होगी, पहले दिन रावण जन्म और क्षीर सागर की भव्य झांकी सजेगी


रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला की आज शुरुआत होगी, पहले दिन रावण जन्म और क्षीर सागर की भव्य झांकी सजेगी


—बारिश के बावजूद रामलीला में शामिल होने के लिए लीला प्रेमियों में उत्साह, खास बनारसी अंदाज में पहुंचने लगे लाेग—यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में रामलीला को किया है शामिल

वाराणसी, 25 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के उपनगर रामनगर में शुक्रवार शाम से विश्वप्रसिद्ध रामलीला की शुरूआत होगी। इसको लेकर रामलीला प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। सुबह से ही आवश्यक कार्यों को पूरा करने के बाद रामलीला प्रेमी अपराह्न से ही खास बनारसी अंदाज में रामनगर अपने साधन से मित्रों और बच्चों के साथ पहुंचने लगे हैं। रामलीला की शुरूआत रावण के जन्म के साथ होगी।

काशी राज परिवार के वंशज डॉ. अनंत नारायण सिंह की मौजूदगी में रामबाग के मुख्य द्वार के पास शाम पांच बचे शुरू होगी। इसमें रावण जन्म और ब्रह्मा जी से वरदान मांगने जैसे कई प्रसंग होंगे। यहां पर तुलसीकृत श्रीरामचरित मानस के बालकांड की कुछ चौपाइयों के गायन के बाद लीला का एक घंटे का विराम होगा। एक घंटे के बाद क्षीर सागर की भव्य झांकी सजेगी। इसके पहले परंपरागत ढंग से रामनगर किले से शाही बग्गी पर महाराज अनंत नारायण सिंह निकलेंगे। लीला पर स्थल पहुंचने पर रामनगर पीएसी के 36वीं वाहिनी के जवान उन्हें सशस्त्र सलामी भी देंगे। रामलीला में देव स्तुति और आकाशवाणी का मंचन भी होगा।

उल्लेखनीय है कि यह अनूठी रामलीला 200 साल से भी पुरानी और ऐतिहासिक है। पूरे एक माह तक चलने वाली इस रामलीला को यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक मंच पर नहीं, बल्कि रामनगर के 5-10 किलोमीटर के दायरे में बने अयोध्या, जनकपुरी, चित्रकूट, लंका जैसे 40 खुले मंचों पर होती है। इस रामलीला में आज भी माइक और आधुनिक लाइट का प्रयोग नहीं होता। मशाल और पेट्रोमैक्स की रोशनी में पात्र ऊंची आवाज में संवाद बोलकर प्रसंगों को जीवंत करते हैं। वाराणसी के जगतगंज के निवासी रामलीला प्रेमी वयोवृद्ध श्याम नारायण पांडेय बताते हैं कि रामनगर की रामलीला विशेष रूप से अपनी भव्यता, विशिष्टता, प्रस्तुति की अनूठी शैली और धार्मिक स्वरूप के लिए जानी जाती है। यह गोस्वामी तुलसीदास जी कृत रामचरितमानस पर आधारित है। रामनगर की रामलीला भाद्रपद शुक्ल अनंत चतुर्दशी से प्रारम्भ होकर आश्विन मास की पूर्णिमा तक चलती है। रामनगर की रामलीला का आयोजन काशीनरेश महाराज उदित नारायण सिंह के शासनकाल में शुरू हुआ था और इसे महाराज ईश्वरी नारायण सिंह ने आमजन के करीब पहुंचाया। 18वीं सदी में तत्कालीन काशी नरेश महाराज बलवंत सिंह ने रामनगर का किला बनवाया था। जहां पर रामलीला की शुरुआत हुई। रामनगर में रामलीला का प्रारंभ सन 1830 के दशक में काशी के महाराजा उदित नारायण सिंह ने शुरू कराया था। वरिष्ठ पत्रकार सुशील मिश्र के अनुसार, रामनगर की रामलीला का मंचन रामचरितमानस के आधार पर अवधी भाषा में होता है। इसमें बिजली की रोशनी और लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि पेट्रोमेक्स (पंचलाईट) और मशाल की रोशनी में अपनी आवाज़ के दम पर यह लीला प्रस्तुत की जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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