अंबेडकर जयंती केवल एक स्मरणोत्सव नहीं बल्कि समानता, न्याय और मानवाधिकारों का एक सशक्त उत्सव : रविन्द्र जायसवाल

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अंबेडकर जयंती केवल एक स्मरणोत्सव नहीं बल्कि समानता, न्याय और मानवाधिकारों का एक सशक्त उत्सव : रविन्द्र जायसवाल


—संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी

वाराणसी, 16 अप्रैल (हि.स.)। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार शाम शहर उत्तरी विधान सभा क्षेत्र के शंकर भवन, गुलाब बाग, सिगरा कार्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ बाबा साहब के प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व सांसद मछली शहर बी.पी.सरोज शामिल हुए। गोष्ठी में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि भारत और विश्व भर में मनाया जाने वाला 14 अप्रैल का अंबेडकर जयंती केवल एक स्मरणोत्सव नहीं बल्कि समानता, न्याय और मानवाधिकारों का एक सशक्त उत्सव है। कई लोग इसे भीमराव अंबेडकर जयंती या डॉ. बी.आर. अंबेडकर जयंती के रूप में भी मनाते हैं, जो उनके योगदान के प्रति गहरे सम्मान को बताता है। इस अवसर पर मंत्री रविन्द्र जायसवाल एवं पूर्व सांसद बी पी सरोज ने मनोज सोनकर, भोला सोनकर, संदीप गौड़, प्रेम पासी, सुनील सोनकर, पप्पू गौड़ को अंग वस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। गोष्ठी में अशोक जाटव, मनोज सोनकर, मनोज गौड़, सुनील सोनकर, प्रेम पासी, विशाल सोनकर, गोकुल सोनकर, भोला नाथ सोनकर, बादल सोनकर, संदीप कुमार गौड़ आदि शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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