शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया गुरुकुल सिखाता है पुस्तक का विमोचन
वाराणसी,1 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में गुरूवार को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में गुरुकुल सिखाता है नामक पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में तथ्यों का संकलन शंकराचार्य महाराज के ब्रह्मचारी शिष्य प्रभुतानंद ने किया है। इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य आधुनिक समाज को यह बताना है कि कैसे प्राचीन गुरुकुल पद्धति के माध्यम से व्यक्ति न्यूनतम संसाधनों में भी श्रेष्ठ और अनुशासित जीवन जी सकता है।
विमोचन के बाद शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति में यह पुस्तक नई पीढ़ी को सादगी और संयम का मार्ग दिखाएगी। उन्होंने शिष्य प्रभूतानन्द ब्रह्मचारी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुकुलों का जीवन दर्शन ही वास्तविक आत्मनिर्भरता की नींव है। पुस्तक में गुरुकुलों के उन सिद्धान्तों का वर्णन है जो सिखाते हैं कि कम से कम संसाधनों में भी मनुष्य कैसे मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर संत और वैदिक गुरुकुलम् के बटुक भी उपस्थित रहे।
श्री विद्यामठ के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि प्रभूतानन्द ब्रह्मचारी बाल्यकाल से ही वेद शिक्षा के लिए शंकराचार्य महाराज के पास काशी आ गये थे। इन्होंने कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का सम्पूर्ण अध्ययन किया और फिर शंकराचार्य की सेवा में आ गये और नैष्ठिक ब्रह्मचारी की दीक्षा लेकर देवार्चन व सेवा करते हुए अब विरक्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

