मोहर्रम का आगाज : सदर इमामबाड़े से निकला जुलूस, शिया बहुल इलाकों में गूंजा गम-ए-हुसैन

WhatsApp Channel Join Now
मोहर्रम का आगाज : सदर इमामबाड़े से निकला जुलूस, शिया बहुल इलाकों में गूंजा गम-ए-हुसैन


वाराणसी, 17 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में मोहर्रम माह के आगाज के साथ ही शिया बहुल क्षेत्रों में ग़म और अकीदत का माहौल दिखाई देने लगा है। शहर के विभिन्न अज़ाखानों और इमामबाड़ों में शोक सभाओं का सिलसिला शुरू हो गया है, जहां अगले 12 दिनों तक हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला में शहीद हुए उनके 72 साथियों की याद में मजलिसें, नौहाख्वानी और मातम आयोजित किए जाएंगे।

पहली मोहर्रम के अवसर पर बुधवार को लाट सरैया स्थित लगभग 600 वर्ष पुराने सदर इमामबाड़े से इमाम हुसैन की याद में जुलूस निकाला गया। इस दौरान “आज तक हम कर्बला की दास्तान भूले नहीं, ये ज़मीन भूले नहीं, आसमान भूले नहीं” जैसे दर्दभरे कलामों की सदाएं गूंजती रहीं।

जुलूस के संयोजक सज्जाद अली तथा सह संयोजक सलमान हैदर ने बताया कि जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को मौलाना राहिब अली ने संबोधित किया। वहीं, सज्जाद हुसैन और फ़ैयाज़ हुसैन ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। जुलूस में अंजुमन हुसैनिया, सज्जादिया, आबिदिया और हाशिमिया सहित कई अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया।

अज़ाखाने के मोतवल्ली सज्जाद अली गुज्जन ने अजादारों का स्वागत किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में रिज़वी और जफर इमाम इंतेजामिया के प्रमुख सदस्य रहे, जबकि सरताज अली, रेहान अली, अलमदार हुसैन और जावेद हुसैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

सलमान हैदर ने बताया कि पिछले दो दशकों से लगातार निकल रहे इस जुलूस में हर वर्ष अजादारों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में अज़ादारी का सिलसिला शुरू हो चुका है। रामनगर, फातमान, पितरकुंड, दालमंडी, भेलूपुर, शिवपुर, दोशीपुरा, पठानी टोला, कच्ची बाग और चौहट्टा समेत कई क्षेत्रों में पहली मोहर्रम पर मजलिसें और मातमी कार्यक्रम आयोजित किए गए। फातमान में मौलाना जफर रज़ा ने मजलिस को संबोधित किया, जबकि हकीम मोहम्मद काज़िम के अज़ाखाने पर वासी मोहम्मद पाशा ने अपने विचार रखे।

सलमान हैदर के अनुसार, वाराणसी की 29 अंजुमनें पूरे जोश और अकीदत के साथ मोहर्रम की अज़ादारी में हिस्सा लेती हैं। उन्होंने बताया कि 18 जून (2 मोहर्रम) को शिवपुर में अंजुमन पंजतनी ज़ुल्जनाह का पारंपरिक जुलूस निकाला जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Share this story