एनएचएआई की नई पहल: वाराणसी-औरंगाबाद सिक्स लेन पर हाईटेक ब्रूमर मशीनों से होगी सफाई

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एक घंटे में 36,000 वर्ग मीटर क्षेत्र होगा स्वच्छ, प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

वाराणसी, 06 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय राजमार्गों को स्वच्छ, सुरक्षित और धूल-मुक्त बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी क्रम में वाराणसी-औरंगाबाद सिक्स लेन परियोजना पर अत्याधुनिक ट्रक-माउंटेड वैक्यूम रोड स्वीपिंग मशीनों (ब्रूमर्स) की तैनाती की गई है। इन हाईटेक मशीनों के जरिए राजमार्गों की नियमित और प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जा रही है। एनएचएआई का यह प्रयास न केवल सड़कों की स्वच्छता बढ़ाएगा, बल्कि वायु गुणवत्ता में सुधार, पर्यावरण संरक्षण और यात्रियों की सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगा। आधुनिक तकनीक से लैस ये मशीनें सड़कों पर जमा धूल, रेत, बजरी, पत्तियों और अन्य कचरे को तेजी से हटाने में सक्षम हैं।

एनएचएआई वाराणसी के परियोजना निदेशक अरुण कुमार ने शनिवार को बताया कि प्रत्येक ब्रूमर मशीन प्रति घंटे लगभग 36,000 वर्ग मीटर क्षेत्र की सफाई कर सकती है। मशीन में 10 घन मीटर क्षमता वाला मलबा संग्रहण हॉपर, उच्च दबाव वाली जल छिड़काव प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, साइड और केंद्रीय स्वीपिंग ब्रश तथा पीएलसी आधारित नियंत्रण प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि इन मशीनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल को दोबारा वातावरण में फैलने से रोकने के लिए इनमें प्रभावी वैक्यूम और जल छिड़काव प्रणाली लगाई गई है। इससे सड़कों की सफाई के साथ-साथ वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

परियोजना निदेशक के अनुसार, इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों को धूल-मुक्त और स्वच्छ बनाए रखना, सड़कों पर फैले मलबे एवं बजरी को हटाकर दुर्घटनाओं की आशंका कम करना तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा यात्रियों को विश्वस्तरीय और अधिक सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

एनएचएआई का मानना है कि आधुनिक सफाई तकनीकों के उपयोग से राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे आम नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर यात्रा वातावरण मिल सकेगा।------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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