आईएमएस-बीएचयू में 'एनजीएस' कार्यशाला, कैंसर निदान की दिशा में हो रही महत्वपूर्ण चर्चा
— प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी के अंतराल को पाटने, 'डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग' पर चर्चा,
वाराणसी, 24 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), चिकित्सा विज्ञान संस्थान की पहल पर तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी और 'डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग'पर चर्चा हुई। 'डायमंड्स' केंद्र (डीएचआर-आईसीएमआर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक सर्विसेज) के तत्वावधान में आयोजित एनजीएस लाइब्रेरी प्रिपरेशन एंड बायोइनफॉरमैटिक्स एनालिसिस विषयक कार्यशाला में कैंसर जीनोमिक्स पर भी मंथन किया गया।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) व भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर ) के सहयोग से स्थापित 'डायमंड्स' केंद्र को कैंसर अनुसंधान और उपचार के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में विकसित किया गया है। इसका मुख्य मिशन जीनोमिक अनुसंधान और नैदानिक अनुप्रयोग के बीच की दूरी को कम करना है, जिससे आधुनिक 'प्रिसिजन मेडिसिन' के लिए आवश्यक म्यूटेशन-आधारित कैंसर परीक्षण संभव हो सकें। कार्यशाला में प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी के अंतराल को पाटने पर भी विमर्श हुआ। बताया गया कि जैसे-जैसे कैंसर का उपचार व्यक्तिगत उपचारों की ओर बढ़ रहा है, नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) तकनीक अपरिहार्य हो गई है। ट्यूमर में विशिष्ट म्यूटेशन की सटीक पहचान करके, चिकित्सक अब सामान्य उपचार के बजाय 'लक्षित थेरेपी' दे सकते हैं, जिससे मरीजों के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इन जटिल तकनीकों के प्रबंधन के लिए कुशल पेशेवरों की बढ़ती मांग को देखते हुए, आईएमएस-बीएचयू ने इस कार्यशाला को पूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार किया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हैदराबाद के डॉ. नीरज चौहान,दर्शन शर्मा के साथ डॉ. रश्मि पटेल और डॉ. मोनिका राजपूत प्रतिभागी चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
कार्यशाला संयोजक प्रो. मनोज पांडेय के अनुसार पहले दिन प्रतिभागियों ने क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में एनजीएस के मूल सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया। मुख्य सत्रों में आयन टोरेंट सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म पर व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्यूबिट के माध्यम से डीएनए मात्रा का निर्धारण और बारकोडिंग के साथ एम्प्लिकॉन-आधारित लाइब्रेरी तैयारी शामिल रही। वहीं, दूसरे दिन 'डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग' पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि स्थानीय शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को इन विशेष तकनीकी कौशलों से सशक्त बनाकर, 'डायमंड्स' केंद्र पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के लिए तकनीक-संचालित कैंसर देखभाल की रीढ़ बनने की दिशा में अग्रसर है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

