वाराणसी में कूड़ा प्रबंधन की मुहिम को मिलेगी नई गति, पार्षद बनेंगे ‘स्वच्छता दूत’

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वाराणसी में कूड़ा प्रबंधन की मुहिम को मिलेगी नई गति, पार्षद बनेंगे ‘स्वच्छता दूत’


वाराणसी, 09 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर को कूड़ा मुक्त और स्वच्छ बनाने की दिशा में वाराणसी के पार्षद अब ‘स्वच्छता दूत’ की भूमिका निभाएंगे। कूड़ा प्रबंधन और स्रोत स्तर पर कचरा पृथकीकरण (सोर्स सेग्रिगेशन) को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्षदों ने संकल्प लिया। मंगलवार को सिगरा स्थित एक होटल में प्रजा फाउंडेशन द्वारा आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषयक कार्यशाला में यह संकल्प सामने आया।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि शहरों में फैली गंदगी के लिए समाज स्वयं जिम्मेदार है, इसलिए उसे स्वच्छ और कूड़ा मुक्त बनाने की जिम्मेदारी भी नागरिकों को ही निभानी होगी। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि पार्षदों के सक्रिय सहयोग के बिना कूड़ा प्रबंधन और स्रोत स्तर पर कचरा पृथकीकरण का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। शहर को स्वच्छ, सुंदर और टिकाऊ बनाने में पार्षदों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यशाला का मुख्य विषय ‘वेस्ट सेग्रिगेशन’ (कचरा पृथकीकरण) रहा। इस दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों तथा कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।

सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद की प्रोफेसर मर्सी ने पार्षदों को प्रशिक्षण देते हुए बताया कि स्वच्छ शहर के लिए घरों में चार रंगों के अलग-अलग डस्टबिन का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि हरा डस्टबिन गीले कचरे, नीला सूखे कचरे, लाल सैनिटरी वेस्ट तथा काला ई-वेस्ट एवं बैटरी जैसे खतरनाक घरेलू अपशिष्ट के लिए निर्धारित किया गया है।

प्रो. मर्सी ने बल्क वेस्ट जनरेटर वाले संस्थानों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2026 से लागू नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुसार 20 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल उपभोग करने वाले अथवा 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को अपने गीले कचरे का ऑन-साइट प्रसंस्करण अनिवार्य रूप से करना होगा। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत स्थानीय निकायों को ‘विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व प्रमाणन’ जारी करने का अधिकार दिया गया है, जिसकी वैधता तीन वर्ष होगी। नियमों के उल्लंघन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।

कार्यशाला का संचालन फाउंडेशन के अविरल दुबे ने किया। कार्यक्रम में बृजेश चंद्र श्रीवास्तव, अशोक मौर्य, विवेक कुशवाहा, मंजू कन्नौजिया, सीमा वर्मा, कुसुम देवी, कौशल्या, रीना, बेबी कुभारी और रमा शंकर पटेल सहित नगर निगम के अन्य पार्षद उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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