वाराणसी के करसड़ा से हटेगा कूड़े का पहाड़, 25 एकड़ जमीन पर लहलहाएगा मियावाकी जंगल

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--शासन से हरी झंडी मिलने के बाद नगर निगम ने शुरू की कवायद, डेढ़ साल में मिलेगी दुर्गंध से निजात

--जापानी तकनीकी से बायोमाइनिंग, मैपिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी

वाराणसी, 26 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी करसड़ा स्थित कूड़े के विशालकाय पहाड़ और भयावह दुर्गन्ध से क्षेत्रीय लोगों को जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। नगर निगम ने वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण की कवायद तेज कर दी है। इसके बाद खाली होने वाली 25 एकड़ भूमि पर मियावाकी तकनीक से सघन जंगल विकसित किया जाएगा, जो पर्यावरण को नई संजीवनी देगा।

निगम ने करसड़ा में जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए बायोमाइनिंग का रास्ता चुना है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जीआइजेड और आरपीयूईएस कंपनियों की मदद ली जा रही है। जापानी तकनीक का उपयोग करते हुए इन कम्पनियों ने पूरे डंपिंग ग्राउंड की मैपिंग और कचरे की मात्रा का सटीक आंकलन कर लिया है। निगम की ओर से बायोमाइनिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है, जिससे निस्तारण कार्य जल्द ही धरातल पर उतरेगा।

करसड़ा में पिछले एक दशक से जमा लगभग 1264 लाख मीट्रिक टन कचरे के कारण आसपास के गांवों में भयंकर दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। हालांकि, कचरे की विशाल मात्रा को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि शहर में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। इस कचरे के निपटान के लिए निगम के पास वर्तमान में करसड़ा में 600 मीट्रिक टन क्षमता का 'वेस्ट टू कम्पोस्ट' प्लांट और रमना में 600 मीट्रिक टन क्षमता का 'वेस्ट टू चारकोल' प्लांट मौजूद है। इसके अलावा रमना में ही मलबे से ईंट और टाइल्स बनाने के लिए सीएंडडी प्लांट भी कार्यरत है। उन्होंने बताया कि करसड़ा का कूड़ा पहाड़ समाप्त होने के बाद, वहां विकसित होने वाला 25 एकड़ का मियावाकी वन शहर के 'ग्रीन लंग्स' (फेफड़ों) के रूप में काम करेगा।

महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि करसड़ा के कूड़े के पहाड़ का निस्तारण हमारी प्राथमिकता है। बायोमाइनिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कूड़ा साफ होने के बाद वहां 25 एकड़ में मियावाकी वन विकसित किया जाएगा, जो वाराणसी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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