( अपडेट) मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को काशी की शहरी सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के विरोध में प्रदर्शन

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( अपडेट) मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को काशी की शहरी सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के विरोध में प्रदर्शन


( अपडेट) मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को काशी की शहरी सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के विरोध में प्रदर्शन


—विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय पर दिखाई एकजुटता, नगर निगम कार्यकारिणी के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग

वाराणसी, 30 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर निगम कार्यकारिणी के मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को शहरी सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। राजनीतिक नागरिक समाज के बैनर तले सिगरा पेट्रोल पंप के समीप बाल गंगाधर तिलक के प्रतिमा के समीप एकत्रित हुए कार्यकर्ता नगर निगम मुख्यालय पदयात्रा करते हुए पहुंचे।

इस दौरान कार्यकर्ता नगर निगम के प्रस्ताव के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे। नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर गलियारे में जुटे कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने मीट,मछली की दुकानों को बंद करने के प्रस्ताव को वापस लेने,रोजी रोटी पर हमला बंद करने, बनारस के बहुसांस्कृतिक ताने—बाने को बर्बाद न करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्ताव को व्यापारियों और आम लोगों के हितों के खिलाफ बताया।

पिछले दिनों नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक में मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को काशी के शहरी सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ था। इसी प्रस्ताव के विरोध में विपक्षी दलों के साथ कुछ सामाजिक संगठन मुखर है। वहीं,काशी के संत समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों,हिन्दूवादी संगठनों ने इस प्रस्ताव का समर्थन कर इसकी सराहना की। विरोध प्रदर्शन में शामिल विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि मीट मांस और मछली की दुकान शहर से बाहर होती है, तो छोटे और मझोले व्यापारी जहां सीधे प्रभावित होंगे। वहीं,शहर से बाहर दुकान होने पर ऑनलाइन इसकी बिक्री बढ़ेगी। मांस , मछली की गुणवत्ता भी खराब होगी। शहर में अब तक लोग खुद अपने सामने और पसंद से मीट मांस और मछली खरीदते है। प्रदर्शन कारियों के अनुसार बनारस जैसे शहर में जो लोग यह सोच रहे होंगे कि मीट मांस और मछली के कारोबार से सिर्फ एक धर्म के लोग जुड़े होते है, तो शायद वह गलत होंगे। इस व्यवसाय से 70 प्रतिशत हिंदू धर्म से भी लोग जुड़े हुए है।

प्रदर्शन में शामिल चौकाघाट मछली मंडी के दिनेश चौहान ने कहा कि नगर निगम का यह फैसला किसी व्यापारिक व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि हजारों छोटे दुकानदारों, कामगारों और उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है।

कांग्रेस के वाराणसी महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वाराणसी सदियों से विविध संस्कृतियों, समुदायों और खान-पान की परंपराओं वाला शहर रहा है। किसी एक विचारधारा के आधार पर लोगों की भोजन संबंधी पसंद और रोजगार के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना शहर की बहुसांस्कृतिक पहचान और संविधान की भावना के विपरीत है। नेताओं ने प्रस्ताव को तुगलकी फरमान करार देते हुए प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, अपना दल कमेरावादी, भाकपा माले, सामाजिक संगठन, विभिन्न छात्र संगठन, ऐपवा, शहर मे मीट मछली व्यवसाय से जुड़े व्यवसायी शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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