वाराणसी नगर निगम की पहल : पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे से अब घर बैठे मिलेगा 'कैश', एडमाइबिन को सौंपा जिम्मा

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वाराणसी नगर निगम की पहल : पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे से अब घर बैठे मिलेगा 'कैश', एडमाइबिन को सौंपा जिम्मा


—शहर में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण और रीसाइक्लिंग के लिए एडमाइबिन अधिकृत

वाराणसी, 28 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी को स्मार्ट और स्वच्छ बनाने की दिशा में नगर निगम ने फिर पहल की है। शहर में कचरे के रूप में फैल रहे इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सही निस्तारण और रीसाइक्लिंग के लिए नगर निगम ने एडमाइबिन को अधिकृत किया है। इस योजना के तहत अब शहरवासी अपने कबाड़ हो चुके इलेक्ट्रॉनिक सामान से न सिर्फ पर्यावरण को बचाएंगे, बल्कि उन्हें इसके बदले 'कैश' (पैसे) भी मिलेगा।

अब कोई भी बिजली या बैटरी से चलने वाला उपकरण, जो अपनी उपयोगी उम्र पूरी कर चुका है, इलेक्ट्रॉनिक कचरे की श्रेणी में आता है। इसमें पुराने मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, की बोर्ड, यूपीएस, टेलीविजन, फ्रिज, वाशिंग मशीन, चार्जर, केबल, पंखे, वाटर प्यूरीफायर, लाइट, बैटरी, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। इन्हें सामान्य कचरे में फेंकने से पर्यावरण और सेहत पर बुरा असर पड़ता है। एडमाइबिन द्वारा शहर में घर-घर जाकर इलेक्ट्रॉनिक कचरा एकत्र किया जाएगा। इसके अलावा कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों और उद्योगों से भी इसका संग्रह होगा। सबसे खास बात यह है कि इस योजना से लोग अपने पुराने कबाड़ को बेचकर पैसे भी कमा सकेंगे (कबाड़ से कैश )। एकत्र किए गए कचरे को अधिकृत चैनलों के माध्यम से सुरक्षित हैंडलिंग और रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण और अपने पुराने सामान के बदले पैसे पाने के लिए नागरिक हेल्पलाइन नंबर 8335955000 पर कॉल करके संपर्क कर सकते हैं। संपर्क करने के बाद समय तय किया जाएगा और टीम आकर कचरा एकत्र कर लेगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखें और स्वच्छ काशी, जिम्मेदार रीसाइक्लिंग के संकल्प में भागीदार बनें।

——हर साल हजारों टन हो रहा ई-वेस्ट

शहरी कचरा प्रबंधन के अनुमानों के मुताबिक, वाराणसी महानगर में हर साल हजारों टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-वेस्ट) पैदा होता है। शहर के घरों, दुकानों और कार्यालयों से निकलने वाले कचरे में मोबाइल फोन, चार्जर, पुरानी एलईडी लाइटें, पंखे, कंप्यूटर और रसोई के छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सबसे ज्यादा मात्रा में होते हैं। आधुनिक तकनीकी दौर में गैजेट्स की बढ़ती खपत के कारण शहर में हर साल ई-वेस्ट की मात्रा में औसतन 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।

——क्यों जरूरी है सही रीसाइक्लिंग?

यदि इन पुराने उपकरणों को सामान्य कचरे में फेंक दिया जाए या कबाड़ में जला दिया जाए, तो इनमें मौजूद सीसा, पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं मिट्टी और भूजल को दूषित कर देती हैं। नगर निगम और एडमाइबिन की यह पहल इसी खतरे से शहर को बचाने के लिए एक ठोस कदम है।

—— नगर आयुक्त ने नदेसर में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स एरीना का किया निरीक्षण

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बुधवार को नदेसर इलाके में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स एरीना का निरीक्षण किया। उन्होंने बॉक्स क्रिकेट टर्फ, पिकल बॉल कोर्ट, रिक्रिएशनल एरीना इत्यादि की प्रगति की समीक्षा भी की। नगर आयुक्त ने कार्यदायी संस्था को समस्त निर्माण कार्य 15 नवम्बर 2026 तक पूर्ण किए जाने के लिए निर्देशित किया। नगर आयुक्त ने कार्यदायी संस्था को यह भी निर्देश दिए कि संपूर्ण कार्य दिव्यांगजनों की सुविधा को देखते हुए किए जायें, बच्चों के शारीरिक कुशलक्षेम हेतु विशेष संसाधन विकसित किए जायें और परिसर में हॉर्टिकल्चर की मात्रा बढ़ायी जाये। साथ ही, बच्चों हेतु स्केटिंग एरीना एवं स्केटिंग क्लास, मॉर्निंग वॉकर्स हेतु सिंथेटिक ईपीडीएम ट्रैक तथा सौंदर्यीकरण के कार्य भी कराए जाने हेतु नगर आयुक्त द्वारा कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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