मोहर्रम : शहर में निकले तीन पारंपरिक जुलूस, अलम व दुलदुल की जियारत के लिए उमड़ा हुजूम

WhatsApp Channel Join Now
मोहर्रम : शहर में निकले तीन पारंपरिक जुलूस, अलम व दुलदुल की जियारत के लिए उमड़ा हुजूम


वाराणसी, 19 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में तीसरी मोहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को ग़म-ए-हुसैन के सिलसिले में तीन प्रमुख पारंपरिक जुलूस पूरी अक़ीदत और एहतराम के साथ उठाए गए। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि तारीखें आगे बढ़ने के साथ ही शहर में मजलिसों और जुलूसों का सिलसिला और तेज़ हो गया है।

पहला जुलूस (औसानगंज): औसानगंज स्थित नवाब की ड्योढ़ी से 100 साल से भी अधिक पुराना कदीमी जुलूस मेंहदी बख़्त के संयोजन में निकला । यहाँ अलम, दुलदुल और ताबूत की ज़ियारत के लिए बड़ी संख्या में मर्द और खवातीन (महिलाएं) पहुँची।

जुलूस से पहले आयोजित मजलिस को प्रोफेसर अज़ीज़ हैदर ने ख़िताब किया। अंजुमन जव्वादिया (पितरकुण्डा) जुलूस के साथ पूरे रास्ते नौहा और मातम करती हुई चल रही थी। इस दौरान मरहूम बशारत हुसैन के पुत्र और पौत्र शहनाई पर मातमी धुन बजाकर ग़म का नज़राना पेश कर रहे थे। रास्ते में अंजुमन हुसैनिया ने भी नौहाख़्वानी और मातम किया।

दूसरा जुलूस (शिवाला): शिवाला में हाजी आलिम हुसैन रिज़वी के निवास (इमामबाड़े) से रात 9 बजे दूसरा जुलूस उठाया गया, जो हरिश्चंद्र घाट के पास कुम्हार के इमामबाड़े पर जाकर संपन्न हुआ। जुलूस से पहले हाजी अंसार हुसैन रिज़वी ने मजलिस को संबोधित किया। रास्ते भर अंजुमन गुलज़ार-ए-अब्बासिया के नौजवान पुरदर्द नौहा और सीनाज़नी का मातम करते हुए चले। नौहाख़्वानी के फ़राएज़ ऋषि बनारसी, प्रिंस और नासिर अब्बास ने अंजाम दिए।

तीसरा जुलूस (रामनगर): रात 8 बजे अंतिम जुलूस रामनगर के वारी गढ़ी स्थित सगीर अहमद साहब के निवास से अलम, दुलदुल और ताबूत का बरामद हुआ। इस जुलूस में रामनगर की स्थानीय अंजुमनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भारी मातम किया। सभी जुलूसों के रास्तों पर अज़ादारों और ज़ियारत करने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। सुरक्षा और व्यवस्था के बीच सभी धार्मिक कार्यक्रम देर शाम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Share this story