संविधान केवल किताब नहीं, जनता की आकांक्षाओं का जीवंत दस्तावेज : डॉ. अरविंद

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संविधान केवल किताब नहीं, जनता की आकांक्षाओं का जीवंत दस्तावेज : डॉ. अरविंद


वाराणसी, 02 सितम्बर (हि.स.)। भारतीय संविधान केवल कुछ विद्वानों द्वारा लिखी गई किताब नहीं, बल्कि देश की जनता की आकांक्षाओं, संघर्षों और सपनों का जीवंत दस्तावेज है। संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में आम जनता की सक्रिय भागीदारी रही और देश के कोने-कोने से मिले सुझावों, पत्रों, ज्ञापनों तथा जनआंदोलनों ने इसे अधिक समावेशी स्वरूप प्रदान किया।

यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ हर्टफोर्डशायर, यूके के लेक्चरर तथा यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमनवेल्थ स्टडीज में पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो एवं एसोसिएट फेलो डॉ. अरविंद कुमार ने कही। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार को सामाजिक विज्ञान संकाय के स्मार्ट क्लास में ‘भारतीय संविधान के निर्माण में जनभागीदारी को समझना’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद कुमार ने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान को केवल संविधान सभा की बहसों तक सीमित करके देखना उसके व्यापक जनसरोकारों को नजरअंदाज करना होगा।

उन्होंने कहा कि संविधान सभा की लगभग दो वर्ष 11 माह 18 दिन चली विचार-विमर्श की प्रक्रिया के दौरान आम नागरिकों की ओर से भेजे गए हजारों ज्ञापनों, पत्रों और सुझावों ने संविधान के स्वरूप को प्रभावित किया। जनता की अपेक्षाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों की मांगों ने विशेष रूप से मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्वों के निर्माण को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि संविधान का निर्माण केवल सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह एक ऐसे भारत के निर्माण का प्रयास था, जिसमें हर नागरिक को स्वतंत्रता, समानता, न्याय और गरिमा का अधिकार मिले।डॉ. कुमार ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि संविधान को केवल पढ़ना या परीक्षा के लिए याद करना पर्याप्त नहीं है। स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय जैसे संवैधानिक मूल्यों को अपने व्यवहार और जीवन में आत्मसात करना ही संविधान के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए युवाओं को संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।कार्यक्रम के दौरान संविधान निर्माण से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक पहलुओं पर चर्चा हुई। व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने संविधान से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर सवाल किए। डॉ. अरविंद कुमार ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान किया।कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी का संरक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के संयोजक राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ रहे।

इस अवसर पर विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेशम लाल, डॉ. विजय कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. ज्योति त्रिपाठी, डॉ. सी.के. मणि पांडेय, डॉ. ज्ञान प्रकाश पांडेय, डॉ. विजय कुमार सिंह सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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