महादेव का गौना उत्सव रंगभरी एकादशी की तैयारियां, सजने लगी दशकों पुरानी पालकी

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महादेव का गौना उत्सव रंगभरी एकादशी की तैयारियां, सजने लगी दशकों पुरानी पालकी


— ‘गौरा-सदनिका’ में मंगल गीत गूंजेंगी, 27 फरवरी को माता गौरा का गौना

वाराणसी, 19 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी)में महादेव के गौना उत्सव रंगभरी एकादशी की तैयारी शुरू हो गई है। फाल्गुन की मादक बयार और गुलाल की आहट के बीच यह उत्सव 27 फरवरी को है। महादेव (प्रतीक रूप से) माता गौरा का गौना लेने आएंगे। गौना उत्सव की तैयारियां श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास ‘गौरा-सदनिका’ में चल रही है। दशकों पुरानी पालकी और रजत शिवाला की साफ-सफाई व मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। रंगभरी एकादशी पर महंत आवास से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती और प्रथमेश की चल प्रतिमाओं की पालकी यात्रा निकलेगी।

महंत पुत्र वाचस्पति तिवारी ने बताया कि 24 फरवरी मंगलवार से चार दिवसीय लोकाचार का शुभारंभ माता गौरा के तेल-हल्दी अनुष्ठान से होगा। प्रतिमा के पूजन के बाद हल्दी की रस्म निभाई जाएगी और गौनहारिनों की टोली पारंपरिक गीतों से इस अनुष्ठान को जीवंत बनाएगी। उन्होंने बताया कि शोभायात्रा में प्रयुक्त होने वाली पुरानी पालकी की साफ-सफाई और मरम्मत का जिम्मा काशी के काष्ठ कलाकार पप्पू संभाल रहे हैं। वे इस सेवा में अपने परिवार की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। लकड़ी की नक्काशी, धातु की जड़ाई और रजत शिवाला की चमक—हर हिस्से को सावधानी से संवारते हुए पप्पू कहते हैं कि यह केवल काम नहीं, बल्कि सेवा है। उनके हाथों की कारीगरी में काशी की आस्था की झलक दिखती है। रजत शिवाला की चमक को नया आभास देने के साथ-साथ उसकी संरचना को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि यात्रा के दौरान कोई व्यवधान न आए।

—राजसी खादी की पोशाक में सजेगे बाबा, अलौकिक होगा गौरा का श्रृंगार

महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के गौने के दिन उनकी चल प्रतिमा को परंपरागत खादी से बनी राजसी पोशाक पहनाई जाएगी। यह पोशाक विशेष रूप से तैयार कराई जा रही है, जिसमें काशी की पारंपरिक बुनावट और सादगी का संगम होगा। माता गौरा का श्रृंगार भी विशेष अलंकरणों और वस्त्रों से किया जाएगा। लाल, पीत और हरित रंगों के संयोजन में सजी प्रतिमा लोकआस्था का केंद्र बनेगी। महंत परिवार स्वयं इस श्रृंगार को अंतिम रूप देने में जुटा है। श्रृंगार के साथ ही पालकी को भी फूलों और रंगीन कपड़ों से सजाया जाएगा, जिससे पूरी शोभायात्रा राजसी आभा से आलोकित हो उठे।

—रजत शिवाला की स्थापना और सप्तर्षि आरती

रंगभरी एकादशी के दिन परंपरानुसार रजत शिवाला को काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। इसके उपरांत काशी की विशेष सप्तर्षि आरती संपन्न होगी। यह क्षण भक्तों के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। आरती के पश्चात बाबा, गौरा और प्रथमेश की पालकी ‘गौरा-सदनिका’ से मंदिर की ओर प्रस्थान करेगी। काशीवासी इस पालकी को अपने कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण कराते हैं। गलियों में ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष गूंजता है और पूरा शहर रंगों के उत्सव में डूब जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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