माघ मेले की शुरूआत पौष पूर्णिमा स्नान से, वाराणसी में गंगा किनारे किए गए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
—प्रयाग से स्नानार्थियों के वाराणसी पलट प्रवाह को लेकर प्रशासन सतर्क
वाराणसी, 02 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले की शुरूआत पौष पूर्णिमा शनिवार से हो रही है। माघ मेला 03 जनवरी से आरंभ होकर 15 फरवरी तक चलेगा। प्रयागराज में त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृष्य सरस्वती का संगम स्थल) के तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के बाद लाखों श्रद्धालुओं का पलट प्रवाह (आगमन) वाराणसी में होगा। काशी में श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन कर वापस अपने घरों को लौटेंगे।
लाखों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देख वाराणसी जिला प्रशासन ने गंगाघाट पर सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तैयारी की है। गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि प्रयागराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में स्नान कर काशी पहुंचते हैं, जहां वे गंगा स्नान, नौकायन कर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं। इसको देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही पूरी तैयारी की है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काशी में रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है, जहां कंबल, रजाई, चादर और तकिए सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत गंगा में एनडीआरएफ और जल पुलिस टीम गश्त कर रही है। स्थानीय कर्मकांडी प्रदीप पांडेय बताते है कि सनातन धर्म में माघ मास को अति पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इस महीने में गंगा स्नान, दान, जप से विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है। माघ मास में प्रयागराज में हर वर्ष माघ मेला लगता है। माघ मेले में देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और कल्पवासी पवित्र संगम में स्नान कर कल्पवास करते है। माघ माह में ऐसे तो पूरे माह पवित्र नदियों में श्रद्धालु स्नान करते है। लेकिन 06 प्रमुख स्नान पर्वो पर स्नान का खास महत्व है। इसमें पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी, मकर संक्रांति – 14 जनवरी, तीसरा मुख्य स्नान मौनी अमावस्या – 18 जनवरी, चौथा बसंत पंचमी – 23 जनवरी, पांचवां माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी , छठा और आखिरी स्नान महाशिवरात्रि – 15 फरवरी को है। इसमें मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, माघी पूर्णिमा को स्नान के लिए सर्वाधिक भीड़ उमड़ती है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

