वाराणसी: नौ गौरी–नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों से पूजित हल्दी लगेगी गौरा को, दुर्गा मंदिर से आएगी हल्दी
—रंगभरी एकादशी तक गूंजेंगे लोकगीत और वैदिक मंत्र, विशेष अनुष्ठान
वाराणसी, 21 फरवरी (हि.स.)। काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ की नगरी में महाशिवरात्रि महापर्व के पश्चात अब शिव-विवाह की रस्मों का अगला और अत्यंत भावपूर्ण अध्याय रंगभरी एकादशी को होगा। रंगभरी एकादशी से पहले माता गौरा के गौने की परंपरागत हल्दी चढ़ाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 24 फरवरी, मंगलवार को सायंकाल 7 बजे टेढ़ीनीम स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास पर माता गौरा की चल प्रतिमा को विधि-विधानपूर्वक गौने की हल्दी अर्पित की जाएगी। सदियों से चली आ रही इस लोकपरंपरा में काशीवासियों की आस्था, सहभागिता और भावनात्मक जुड़ाव भी दिखेगा।
महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने शनिवार को बताया कि इस वर्ष गौने की हल्दी काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर (दुर्गाकुंड) से विशेष पूजन के उपरांत महंत परिवार द्वारा लाई जाएगी। नौ गौरी और नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों से अभिमंत्रित यह हल्दी केवल एक अनुष्ठानिक सामग्री नहीं, बल्कि श्रद्धा, शास्त्र और लोकविश्वास का प्रतीक भी है।
—नौ गौरी–नौ दुर्गा के मंत्रों से अभिमंत्रित होगी हल्दी
दुर्गा मंदिर के महंत कौशल द्विवेदी ने बताया कि काशी की प्राचीन लोकपरंपरा के अनुसार गौरा के गौने का दायित्व स्वयं काशीवासियों द्वारा निभाया जाता है। विवाह के उपरांत जिस प्रकार घर-परिवार में दुल्हन को गौने से पूर्व हल्दी लगाई जाती है, उसी भाव से माता गौरा को भी यह मंगल-रस्म अर्पित की जाती है। उन्होंने बताया कि रंगभरी एकादशी से पूर्व 24 फरवरी को दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान संपन्न होगा। काशी की नौ देवियों और नौ गौरियों के आव्हान मंत्रों के साथ हल्दी को विधिवत पूजित किया जाएगा। इसके पश्चात महंत परिवार हल्दी लेकर शोभायात्रा स्वरूप टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास तक लेकर पहुंचेगा।
——टेढ़ीनीम महंत आवास में भव्य अनुष्ठान
महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने बताया कि 24 फरवरी को हल्दी चढ़ाने से पूर्व माता गौरा का 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष पूजन किया जाएगा। वेद मंत्रों की गूंज, शंखध्वनि और घंटानाद के बीच गौरा की चल प्रतिमा को मंडप में विराजमान किया जाएगा। पूजन उपरांत परंपरागत रीति से हल्दी अर्पित की जाएगी। इसके बाद माता गौरा का भव्य श्रृंगार होगा। काशी की पारंपरिक शैली में वस्त्र, आभूषण और पुष्पों से सुसज्जित गौरा का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए दिव्य दर्शन का अवसर बनेगा।
उन्होंने कहा कि जैसे ही हल्दी की रस्म आरंभ होगी, महंत आवास में मंगलगीतों और सोहर की गूंज सुनाई देगी। काशी की महिलाएं पारंपरिक गीतों के माध्यम से इस अवसर को भावपूर्ण बनाती हैं। लोक मान्यता है कि बाबा और गौरा केवल आराध्य देव नहीं, बल्कि काशी के परिवार के सदस्य हैं।
रंगभरी एकादशी तक चलेगा मांगलिक क्रम
गौने की हल्दी से प्रारंभ हुआ यह मांगलिक क्रम रंगभरी एकादशी तक निरंतर चलता रहेगा। रंगभरी एकादशी वह पावन अवसर है जब बाबा विश्वनाथ माता गौरा को ससुराल से विदा कर अपने धाम लाते हैं। इस दिन अबीर-गुलाल और पुष्पवर्षा से संपूर्ण काशी रंग और भक्ति में डूब जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

