64 दिन बाद अपने पारंपरिक स्थल दशाश्वमेध घाट पर हुई मां गंगा की विश्वप्रसिद्ध आरती, गूंजे घंट-घड़ियाल
वाराणसी, 20 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में गंगा का जलस्तर घटने के बाद मां गंगा की विश्वप्रसिद्ध सायंकालीन आरती मंगलवार को दशाश्वमेध घाट पर अपने पारंपरिक स्थल पर संपन्न हुई। करीब 64 दिनों बाद मूल स्थान पर लौटी आरती के दौरान घंट-घड़ियाल की गूंज से पूरा घाट भक्तिमय हो उठा। इस भावपूर्ण क्षण के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु घाट पर मौजूद रहे।
विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती का आयोजन करने वाली संस्था गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण पिछले 64 दिनों से दशाश्वमेध घाट पर होने वाली आरती निधि के कार्यालय की छत पर आयोजित की जा रही थी। जलस्तर में कमी आने के बाद मंगलवार को मां गंगा की आरती पुनः अपने पारंपरिक स्थल पर विधि-विधान से संपन्न हुई।
——प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर भी होगी आरती
उधर, प्राचीन दशाश्वमेध घाट (शीतलाघाट) पर गंगोत्री सेवा निधि की ओर से आयोजित होने वाली गंगा आरती भी बुधवार से अपने मूल स्वरूप में लौटेगी। गंगा में आई बाढ़ के कारण पिछले 64 दिनों से यह आरती समिति की छत पर आयोजित की जा रही थी। अब जलस्तर कम होने के बाद इसे पुनः पारंपरिक स्थल पर आयोजित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
गंगोत्री सेवा निधि के पदाधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए छत पर आरती का नियमित आयोजन किया गया। गंगा का जलस्तर घटने के बाद घाट पर जमा सिल्ट और गंदगी की सफाई कराई गई। साथ ही स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है, ताकि आरती का आयोजन सुचारु रूप से हो सके।
——बाढ़ के बावजूद कायम रही आरती की परंपरा
काशी की गंगा आरती धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और जनआस्था का विशिष्ट प्रतीक है। इस दिव्य आयोजन को देखने के लिए प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दशाश्वमेध घाट पहुंचते हैं।
बाढ़ के कारण घाटों पर सामान्य रूप से आरती आयोजित करना संभव नहीं था, लेकिन दोनों संस्थाओं ने वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए इस परंपरा को जारी रखा। अब गंगा का जलस्तर घटने और घाटों पर आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद आरती के अपने पारंपरिक स्थलों पर लौटने से श्रद्धालुओं में उत्साह है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

