अघोरपीठ में अघोराचार्य का छठी समारोह, उमड़ा आस्था और विश्वास का जनसैलाब

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अघोरपीठ में अघोराचार्य का छठी समारोह, उमड़ा आस्था और विश्वास का जनसैलाब


-क्रीं कुंड में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, संतों की समाधियों और पीठाधीश्वर का किया दर्शन-पूजन

वाराणसी, 17 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में लोलार्क छठ (लोलार्क षष्ठी) के अवसर पर गुरुवार को रविंद्रपुरी स्थित अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम की तपोस्थली क्रीं कुंड में आस्था और श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं ने क्रीं कुंड में आस्था की डुबकी लगाई और इसके बाद अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम सहित परिसर में स्थित संतों की समाधियों पर श्रद्धा अर्पित की।

श्रद्धालुओं ने बाबा कीनाराम के पुनरागमित स्वरूप के साथ अघोरपीठ के वर्तमान 11वें पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम का भी दर्शन-पूजन किया। पर्व को लेकर सुबह से ही आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। आश्रम के बाहर मेले जैसा दृश्य दिखाई दिया।

आध्यात्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सामाजिक संस्थान अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान के महिला मंडल की ओर से रक्तदान शिविर लगाया गया। शिविर में श्रद्धालुओं सहित कई लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।

पर्व के मद्देनजर आश्रम परिसर में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई। दैनिक आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

काशी को प्राचीन काल से ही धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। अघोर परंपरा में बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं कुंड का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बाबा कीनाराम ने इसी स्थल पर साधना की थी। यह स्थान अघोर परंपरा के प्रमुख सिद्धपीठों में गिना जाता है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन एवं साधना के लिए पहुंचते हैं।

अघोर परंपरा के अनुयायियों के लिए बाबा कीनाराम का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। लोलार्क छठ का पर्व बाबा कीनाराम के जन्म के छठवें दिन की स्मृति में मनाया जाता है। इसी मान्यता के चलते इस अवसर पर क्रीं कुंड में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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