बनारस रेलवे स्टेशन से वाराणसी-दिल्ली स्लीपर ट्रेन की हुई शुरूआत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी ने हरी झंडी दिखाई

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बनारस रेलवे स्टेशन से वाराणसी-दिल्ली स्लीपर ट्रेन की हुई शुरूआत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी ने हरी झंडी दिखाई


बनारस रेलवे स्टेशन से वाराणसी-दिल्ली स्लीपर ट्रेन की हुई शुरूआत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी ने हरी झंडी दिखाई


बनारस रेलवे स्टेशन से वाराणसी-दिल्ली स्लीपर ट्रेन की हुई शुरूआत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी ने हरी झंडी दिखाई


—वाराणसी सिटी-राजातालाब के बीच मेमू ट्रेनें, बनारस-प्रयागराज रामबाग के बीच शुरू हुई नई सेवा

वाराणसी,31 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बनारस रेलवे स्टेशन से शनिवार शाम वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, वाराणसी सिटी-राजातालाब के बीच चार जोड़ी मेमू ट्रेनें और बनारस-प्रयागराज रामबाग के बीच नई ट्रेन सेवा का शुभारंभ हुआ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बनारस रेलवे स्टेशन पर आयोजित समारोह में ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रेल मंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया और कहा कि इन नई सुविधाओं से काशी, प्रयागराज और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीच का सफर बेहद आसान और आरामदायक हो जाएगा। रेल मंत्री ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की विशेषताओं को बताते हुए कहा कि इसमें यात्रियों के साथ-साथ लोको पायलट और ऑन-बोर्ड स्टाफ की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। ट्रेन में फिसलन और पुरानी तकनीकी समस्याओं को पूरी तरह दूर किया गया है। यह ट्रेन वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर होते हुए दिल्ली (अलीगढ़ और गाजियाबाद के रास्ते) तक का सफर तय करेगी।

रेलवे के अफसरों के अनुसार, वाराणसी से नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। यात्रियों की सुविधा और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए रेल मंत्रालय ने इस सेवा को मंजूरी दी है। नई ट्रेन के शुरू होने से काशी और दिल्ली के बीच रात्रिकालीन यात्रा अधिक तेज, आरामदायक और सुविधाजनक होगी। ट्रेन संख्या 27421 वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर वाराणसी से रात 8:50 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 6:10 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। वहीं, वापसी में ट्रेन संख्या 27422 नई दिल्ली-वाराणसी रात 9:40 बजे दिल्ली से प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 7:10 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस तरह यात्री रात में सफर कर सुबह अपने गंतव्य पर पहुंच सकेंगे और दिनभर अपने जरूरी काम निपटा सकेंगे।

यात्रा के दौरान ट्रेन प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन संचालित होगी। वाराणसी से सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार को चलेगी, जबकि नई दिल्ली से सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार और रविवार को इसका संचालन होगा।

16 कोच, 823 बर्थ और अत्याधुनिक सुविधाएं

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 16 कोच वाली इस अत्याधुनिक ट्रेन में कुल 823 बर्थ उपलब्ध होंगी। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी वातानुकूलित कोच होंगे। ट्रेन को पूरी तरह वातानुकूलित बनाया गया है, ताकि यात्रियों को रातभर के सफर में बेहतर आराम मिल सके। मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित इस ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसमें आरामदायक बर्थ, बेहतर शोर नियंत्रण, कंपन में कमी और तापरोधी व्यवस्था जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

ट्रेन का रेलमंत्री और मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण

वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस के शुभारंभ के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन का निरीक्षण किया। इस दौरान कोच में मौजूद स्कूली बच्चों से मुख्यमंत्री और रेलमंत्री ने बातचीत की और उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान एक छात्र ने ‘ विकसित भारत’ थीम पर बनाई अपनी पेंटिंग भी दिखाई। मुख्यमंत्री ने छात्र की जमकर सराहना की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा-

आज दिल्ली और काशी के बीच रेल से यात्रा करने वालों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। काशी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के शुरू होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यात्रियों का यात्रा अनुभव भी बेहतर होगा। आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस, यह देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है। इसके पहले उन्होंने लिखा कि काशी से प्रयागराज होते हुए कानपुर सेंट्रल और फिर दिल्ली तक चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों, युवाओं और व्यापारियों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी। चाहे बाबा विश्वनाथ के दर्शन हों या संगम की यात्रा, यह ट्रेन सबको जोड़ेगी।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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