कांग्रेनारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लागू करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : अर्जुन राम मेघवाल

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कांग्रेनारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लागू करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : अर्जुन राम मेघवाल


वाराणसी, 22 अप्रैल (हि.स.)। केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर बुधवार को यहां विरोधी दलों पर सीधा आरोप लगाया कि केवल राजनीतिक लाभ और श्रेय की राजनीति के चलते इस मुद्दे पर बाधा डाल रहे। उन्होंने कहा कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए पहले जनगणना और उसके बाद परिसीमन अनिवार्य है। केन्द्रीय मंत्री यहां भाजपा महिला मोर्चा पदाधिकारियों के साथ मीडिया से रूबरू हुए थे। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेदों में इसके लिए प्रावधान हैं। परिसीमन आयोग के बिना सीटों का पुनर्निर्धारण नहीं हो सकता, इसलिए अधिनियम को लागू करने की एक प्रक्रिया है। केन्द्रीय मंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों और परिसीमन की प्रक्रिया के कारण इसमें समय लग सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि देश की महिलाएं इस कानून से जुड़ी उम्मीदें लगाए बैठी हैं, लेकिन विपक्ष की राजनीति के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यह मातृशक्ति को सशक्त करने का अवसर था, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने सभी दलों से चर्चा के बाद एक फॉर्मूला तैयार किया था। इसमें लोकसभा की मौजूदा सीटें 543 और परिसीमन के बाद संभावित सीटें लगभग 815 होनी थी। इसमें 33 फीसद आरक्षण लगभग 272 सीटें महिलाओं के लिए तय था। इस फॉर्मूले पर अधिकांश दलों ने प्रारंभिक सहमति भी जताई थी। उन्होंने कहा कि जब विधेयक पास हुआ था, तब सभी दलों ने समर्थन दिया था, लेकिन अब इसे लागू करने के समय अलग-अलग बहाने बनाए जा रहे हैं। कांग्रेस की नफरत वाली राजनीति व विपक्ष को डर है कि इसका क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल जाएगा, इसलिए वे इसे टालने की कोशिश कर रहे हैं। ये सारी राजनीति कांग्रेस की है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि मुस्लिम महिलाओं को अलग आरक्षण दिया जाय। डीएमके को दक्षिण भारत की सीटें कम होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इसी राजनीति के चलते इसके कार्यान्वयन में बाधा डाली है, ऐसा करके उन्होंने मातृशक्ति के अधिकारों का हनन किया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

एक सवाल के जबाब में केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान में संभव नहीं है। परिसीमन के बाद भी राज्यों की राजनीतिक ताकत संतुलित बनी रहेगी। उन्होंने महिला आरक्षण के इतिहास का उल्लेख कर कहा कि 1927 में पहली बार महिलाओं के अधिकारों की मांग उठी थी। संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर ने महिलाओं को पुरुषों के साथ समान मतदान अधिकार दिलाया। वर्ष 1996 में पहली बार महिला आरक्षण बिल संसद में आया। तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने भी प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि 2023 में पहली बार यह कानून पारित हुआ, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है। वार्ता में भाजपा के वाराणसी महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरी, एमएलसी सीमा द्विवेदी, साधना वेदांती आदि भी मौजूद रही। वाराणसी आने के पहले केन्द्रीय कानून मंत्री का स्वागत भाजपा के पदाधिकारियों ने बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अन्तर राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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