आई बी की अपर निदेशक ने काशी विश्वनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को परखा

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आई बी की अपर निदेशक ने काशी विश्वनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को परखा


आई बी की अपर निदेशक ने काशी विश्वनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को परखा


वाराणसी, 21 मई (हि.स.)। श्री काशी विश्वनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जाएगा। मंदिर परिसर की परिधीय दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने सहित आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

गुरुवार को अपर निदेशक आईबी विनीता शर्मा, पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल तथा अपर पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) तरुण गाबा ने मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के साथ धाम क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा एवं जनसुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए धाम क्षेत्र की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों ने प्रमुख द्वार संख्या-4 के निकट प्रशासनिक भवन के पास से वैकल्पिक निकास मार्ग संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि गंगा द्वार और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सके।

धाम क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मंदिर परिसर की परिधीय दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लिया गया। वहीं, भैरव गेट पर भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक स्लाइडिंग गेट लगाने का प्रस्ताव रखा गया। गलियों और संवेदनशील मार्गों में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर निगरानी और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों ने धाम क्षेत्र में पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ और अन्य अर्धसैनिक बलों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने पर जोर दिया। संवेदनशील स्थलों पर रूफटॉप ड्यूटी लगाने तथा ड्रोन, पीटीजेड कैमरों, वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीक के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। कंट्रोल रूम को अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करने और ब्लाइंड स्पॉट समाप्त करने के लिए एआई आधारित अतिरिक्त कैमरे लगाने की कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश एवं निकास मार्गों पर चरणबद्ध बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन प्रणाली लागू करने पर बल दिया गया। आपात स्थिति से निपटने के लिए होल्डिंग एरिया विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। श्रावण मास और विशेष पर्वों के दौरान नो-व्हीकल तथा नो-मैन ज़ोन लागू करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।

बैठक में वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने, लंबी कतारों में वीडियो वॉल, आरती प्रसारण और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। सभी प्रवेश द्वारों पर एक्स-रे बैगेज स्कैनर, मल्टी-जोन डीएफएमडी और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। साथ ही प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची प्रदर्शित करने और अतिरिक्त लॉकर व बैगेज काउंटर स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।

गंगा घाटों और जलमार्ग सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जल पुलिस, एनडीआरएफ और पीएसी की संयुक्त बोट पेट्रोलिंग को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। मोटर बोट की संख्या बढ़ाने और घाटों पर निगरानी सघन करने पर भी जोर दिया गया।

समीक्षा बैठक में सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों को आधुनिक उपकरणों के संचालन, आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण का विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए। मंदिर परिसर में कार्यरत स्थायी, अस्थायी और निजी सुरक्षा कर्मियों के सत्यापन अभियान को तेज करने के साथ येलो जोन में रहने वाले व्यक्तियों, नाविकों और दुकानदारों के सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया गया।

अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को भी धाम सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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