भारतीय संस्कृति में शस्त्र पूजन की परंपरा शक्ति, शौर्य एवं सुरक्षा के प्रति सम्मान का प्रतीक
—श्री काशी विश्वनाथ धाम में विजयादशमी पर शास्त्रोक्त विधि-विधान से शस्त्र पूजन
वाराणसी, 20 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में विजयादशमी के पावन अवसर पर मंगलवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित मंदिर चौक के सांस्कृतिक मंच पर शस्त्र पूजन समारोह का आयोजन श्रद्धा एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का प्रतिनिधित्व करते हुए यजमान के रूप में मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने शास्त्रोक्त विधि से शस्त्र पूजन संपन्न किया।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय की स्मृति से जुड़ा यह पर्व हमें सत्य, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति में शस्त्र पूजन की परंपरा शक्ति, शौर्य एवं सुरक्षा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह परंपरा शस्त्रों के सदुपयोग तथा समाज, राष्ट्र और धर्म की रक्षा के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश भी देती है।
पूजन समारोह के दौरान विधि-विधानपूर्वक शस्त्रों का पूजन किया गया तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता, शांति और सुरक्षा की कामना की गई।
स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी ने विधि-विधान से किया शस्त्र पूजन, सनातन परंपरा और क्षत्रिय गौरव का दिया संदेश
वर्ष 1954 से स्थापित परंपराओं का निर्वहन करते हुए स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, एकजुटता और गौरवशाली परंपराओं के तहत विजयादशमी पर्व पर मंगलवार को शस्त्रपूजन किया। छत्तातले चौक स्थित दुर्गा भवन, लालू सेठ के कटरा में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में सनातन संस्कृति, शौर्य, पराक्रम एवं क्षत्रिय परंपराओं के प्रति आस्था प्रकट की गई।
शस्त्र पूजन कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम सेठ ‘बच्चा’ ने किया। कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत कमेटी के महामंत्री राजू वर्मा ने जबकि कोषाध्यक्ष विक्रम सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान काशी के प्रकांड विद्वान कृष्ण मोहन शुक्ल व विपिन गर्ग के सानिध्य में दुर्गा सप्तशती का संपुट पाठ किया गया। धार्मिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के बीच संपन्न शस्त्र पूजन ने विजयादशमी के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
मठ से राष्ट्र के नाम शांति-वीरता का दिया संदेश
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित अन्नपूर्णा मठ मंदिर में परम्परानुसार ध्वजारोहण के बाद शस्त्र पूजा मंहत शंकरपुरी महाराज ने किया। इसके पहले मंदिर के महंत शंकरपुरी जी महाराज ने माता अन्नपूर्णा के ध्वज का विधि-विधान से रोहण किया। उन्होंने बताया कि काशी अन्नपूर्णा मठ मंदिर में, परम्परानुसार यह पूजा होती है। आज विजयदशमी है और विजयदशमी को ध्वज शांति और वीरता का प्रतीक होता है, विजय का प्रतीक होता है। उसी को देखते हुए आज विजयदशमी को माता अन्नपूर्णा का झंडा रोहण कर मठ का झंडा चढ़ाया गया।
महंत ने कहा कि विजयदशमी का ध्वज केवल ध्वज नहीं, यह शांति, वीरता और विजय का प्रतीक है। इस दिन ध्वज रोहण से माँ अन्नपूर्णा की कृपा पूरे काशी और देश पर बनी रहती है। उन्होंने काशी सहित समस्त भारतवासियों और सनातन धर्मावलंबियों को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए सभी के मंगलमय जीवन की कामना की।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

