श्री काशी विश्वनाथ मंदिर घाट पर लगातार दूसरे दिन लेज़र शो, 10 मिनट की भव्य प्रस्तुति

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर घाट पर लगातार दूसरे दिन लेज़र शो, 10 मिनट की भव्य प्रस्तुति


—गंगा आरती के तुरंत बाद शो,काशी की सांस्कृतिक विरासत देख श्रद्धालु आह्लादित

वाराणसी, 11 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगाघाटों पर सांयकालीन गंगाआरती की अब वैश्विक पहचान बन चुकी है।

दशाश्वमेध घाट,प्राचीन दशाश्वमेधघाट, अस्सी और नमोघाट के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के घाट (ललिताघाट, गंगा दयार) पर शुरू हुई गंगा आरती दो दिनों में ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को लुभाने लगी है। इसमें चार चांद लेजर शो लगा रहा है। गंगा द्वयार पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से आयोजित गंगा आरती के दूसरे दिन शनिवार शाम भी लेजर शो देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धाम के लेजर शो को सर्वश्रेष्ठ शो का पुरस्कार भी मिल चुका है।

बताते चलें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर घाट अंग्रेजी वर्णमाला के “एल” आकार में निर्मित है। काशी विश्वनाथ मंदिर घाट रैंप बिल्डिंग की दीवार, भव्य भैरव द्वार एवं व्यूइंग गैलरी की प्राचीर को समेकित करता है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, अब आगे से इसी घाट की प्राचीर पर प्रकाश एवं ध्वनि के समन्वय के माध्यम से लेज़र शो का मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया जाएगा।

इस प्रस्तुति में काशी के गौरवपूर्ण इतिहास, सांस्कृतिक विरासत एवं आध्यात्मिक महिमा का दृश्यात्मक प्रदर्शन किया गया है। बताया गया कि गत वर्ष गंगा नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण लेज़र शो से संबंधित सभी मशीनों के पोल जलमग्न हो गए थे, जिसके फलस्वरूप यह शो अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। लंबे समय तक जलमग्न रहने के कारण मशीनों में सिल्ट भर गई और वे निष्क्रिय हो गईं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में महीनों तक जलमग्न रही इन मशीनों को पुनः संचालन योग्य बनाना अभियांत्रिकी की दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुंबई से विशेषज्ञ तकनीशियनों की टीम को आमंत्रित किया तथा विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों से तकनीकी सहयोग प्राप्त कर इस जटिल कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। परिणामस्वरूप लेज़र शो को पूर्ववत गुणवत्ता के साथ पुनः संचालित किया जा रहा है।

मंदिर न्यास के अनुसार यह लेज़र शो प्रतिदिन गंगा आरती के तुरंत पश्चात आयोजित किया जाएगा। लगभग 10 मिनट की इस प्रस्तुति में प्रकाश एवं ध्वनि के प्रभावशाली संयोजन द्वारा काशी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास श्रद्धालुओं के अनुभव को और अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए निरंतर नवाचार एवं संवेदनशील धार्मिक प्रबंधन के लिए प्रयास कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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