काशी विश्वनाथ धाम में सजी सुर, लय, ताल और भक्ति की आठवीं सांस्कृतिक संध्या
- महाअष्टमी पर ‘देवी दयानी दानी दाता’ की गूंज, कथक-भरतनाट्यम और शास्त्रीय वाद्यवृंद ने बांधा समां
वाराणसी, 18 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर रविवार शाम श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित शंकराचार्य चौक में आठवीं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। शास्त्रीय संगीत, नृत्य और वाद्यवृंद की मनोहारी प्रस्तुतियों से सजी इस संध्या में देवी आराधना और शिवभक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। कलाकारों ने अपनी साधना, भावाभिव्यक्ति और उत्कृष्ट कला के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. रामशंकर के भक्तिपूर्ण गायन से हुआ। उन्होंने देवी स्तुति ‘देवी दयानी दानी दाता’ की प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद अपने गुरु रामरंग जी की रचना शिवमहिमा पर आधारित स्तुति ‘हर हर महादेवा’ के भावपूर्ण गायन से श्रोताओं को शिवभक्ति के रस में डुबो दिया। गायन का समापन ‘शिव शिव जपत’ भजन से हुआ। इस दौरान तबले पर पीयूष कुमार, संवादिनी पर हर्षित पाल और साइड रिदम पर वेणु वनीता ने सुमधुर संगति प्रदान की।
कथक और भरतनाट्यम के समन्वय ने किया भावविभोर
सांस्कृतिक संध्या की दूसरी प्रस्तुति शिवानी मिश्रा एवं उनके नृत्य समूह ‘शिवोहम’ ने दी। समूह ने कथक और भरतनाट्यम के कलात्मक समन्वय के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को साकार किया। देवी स्तुति से आरंभ हुई इस प्रस्तुति में सती दाह के मार्मिक प्रसंग को प्रभावशाली नृत्याभिनय के जरिए प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की भावपूर्ण मुद्राओं और सधे हुए नृत्य ने दर्शकों के मन में करुणा, श्रद्धा और आध्यात्मिक संवेदना का संचार किया। प्रस्तुति का समापन आकर्षक तराने के साथ हुआ
नृत्य समूह में सुनिधि पाठक, सौरभ त्रिपाठी, अनन्या सिंह, सुषमा भारती, विशाल सिंह, निर्जला रस्तोगी, हिमांशी रस्तोगी और अंकित कुमार ने सहभागिता की।
शास्त्रीय वाद्यवृंद ‘आनंद कानन’ ने बिखेरी सुरों की छटा
संध्या की अंतिम प्रस्तुति आनंद मिश्रा एवं उनके सहयोगी कलाकारों के शास्त्रीय वाद्यवृंद ‘आनंद कानन’ की रही। राग पूरिया कल्याण में रूपक ताल पर आधारित रचना से आरंभ हुए वाद्यवृंद ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहनता, माधुर्य और लयात्मक सौंदर्य को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
सितार पर आनंद मिश्रा, तबले पर उदय शंकर, बांसुरी पर रवि प्रजापति और पखावज पर आदित्यदीप ने अपने वादन कौशल तथा उत्कृष्ट तालमेल से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न वाद्ययंत्रों से निकली मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया और संध्या की आध्यात्मिक अनुभूति को और गहन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।
मंदिर न्यास के अनुसार,महाअष्टमी पर आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सनातन आध्यात्मिक परंपरा के जीवंत समन्वय का प्रतीक बनी। श्री काशी विश्वनाथ धाम का शंकराचार्य चौक देवी आराधना, शिवभक्ति और भारतीय कला-साधना के इस अनूठे संगम का साक्षी बना।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

