काशी विश्वनाथ धाम की सांस्कृतिक संध्या में सुरों और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने मोहा मन

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काशी विश्वनाथ धाम की सांस्कृतिक संध्या में सुरों और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने मोहा मन


——शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन भक्ति, संगीत और भारतीय संस्कृति का दिखा अद्भुत संगम

वाराणसी, 15 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन गुरुवार शाम श्री काशी विश्वनाथ धाम में भक्ति, आस्था और भारतीय संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। धाम स्थित मंदिर चौक (शंकराचार्य चौक) में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में गायन और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुरों की मधुरता और नृत्य की जीवंत अभिव्यक्ति से पूरा परिसर भक्तिमय एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में सराबोर हो उठा।

सांस्कृतिक संध्या में रंजना रॉय और शुभम द्विवेदी ने अपनी सुमधुर गायकी से श्रोताओं को भावविभोर किया। वहीं, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कलाकार पंडित विशाल कृष्ण ने अपनी विशिष्ट कलात्मक प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। महाराष्ट्र से आईं स्वाति कोहले एवं उनके समूह ने पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध झलक प्रस्तुत की। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और सांस्कृतिक संध्या का भरपूर आनंद लिया।

श्री काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं को भारतीय कला, संगीत और नृत्य की विविध विधाओं से रूबरू करा रहे हैं। मां भगवती की आराधना और बाबा विश्वनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा के बीच सजी यह सांस्कृतिक संध्या आध्यात्मिक अनुभूति के साथ भारतीय परंपराओं की जीवंतता का संदेश देती नजर आई।

मंदिर न्यास के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सनातन परंपराओं के संरक्षण, भारतीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन और नई पीढ़ी को देश की समृद्ध विरासत से जोड़ना है। धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का यह समन्वय काशी की आध्यात्मिक गरिमा को नई अभिव्यक्ति देने के साथ देश की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच प्रदान कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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