श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं को अच्छा अनुभव हो, नई ऐप-आधारित व्यवस्था लागू

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं को अच्छा अनुभव हो, नई ऐप-आधारित व्यवस्था लागू


——मंदिर न्यास ने लिया निर्णय,एक मई के बाद चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा

वाराणसी, 30 अप्रैल (हि.स.)। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंदिर न्यास ने ऐप-आधारित नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यह प्रणाली एक मई के बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. विश्वभूषण ने गुरुवार शाम बताया कि नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं के कुछ मूल विवरण अनिवार्य रूप से लिए जाएंगे। इसके लिए एक विशेष ऐप-आधारित दर्शन प्रणाली विकसित की जा रही है। सुगम दर्शन, अभिषेक, आरती अथवा अन्य विशेष सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले श्रद्धालुओं को आधार संख्या सहित आवश्यक जानकारी पंजीकृत करनी होगी।

उन्होंने बताया कि एकत्रित डेटा के आधार पर श्रद्धालुओं का क्षेत्रीय और भाषाई वर्गीकरण किया जा सकेगा। इससे विभिन्न भाषाओं में दक्ष कर्मियों की नियुक्ति कर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक सहज और संतोषजनक अनुभव मिल सके।

डॉ. विश्वभूषण ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। आगंतुकों की पहचान संबंधी जानकारी सीमित अवधि तक सुरक्षित रखी जाएगी। फिलहाल यह प्रणाली केवल विशेष सेवाओं—जैसे आरती या विशिष्ट अनुरोध—के लिए आने वाले श्रद्धालुओं पर लागू की जाएगी।

उन्होंने बताया कि मंदिर में विभिन्न भाषाई और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं, जिससे कई बार संवाद में कठिनाई होती है। इस नई पहल से इस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया गया है।

न्यास ने स्पष्ट किया कि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दर्शन व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। काशीवासियों के लिए विशेष द्वार से प्रातः और सायंकाल निःशुल्क दर्शन की सुविधा भी यथावत जारी रहेगी।

मंदिर न्यास ने इस नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है। साथ ही, सुझावों का स्वागत करते हुए बताया गया कि श्रद्धालु अपनी प्रतिक्रिया न्यास की आधिकारिक वेबसाइट skvt.org या समय-समय पर जारी ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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