जन्माष्टमी पर काशी में लीला : मोरपंख धारण कर जब 'हर' बने 'हरि', मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला

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जन्माष्टमी पर काशी में लीला : मोरपंख धारण कर जब 'हर' बने 'हरि', मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला


जन्माष्टमी पर काशी में लीला : मोरपंख धारण कर जब 'हर' बने 'हरि', मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला


जन्माष्टमी पर काशी में लीला : मोरपंख धारण कर जब 'हर' बने 'हरि', मिट गया कैलाश और क्षीरसागर का फासला


—गंगा तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी, बनके आज वो कुंजबिहारी.., बाबा विश्वनाथ के ‘हरि’ स्वरूप के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, कैलाश और वृंदावन की भक्ति का अद्भुत संगम

वाराणसी, 04 सितंबर (हि.स.)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार की शाम काशी में शिव और श्रीकृष्ण की एकात्मता का अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ की चल रजत प्रतिमा का श्रीकृष्ण के ‘हरि’ स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। मोरपंख मुकुट, आकर्षक पीतांबर और बांसुरी की छवि से सजे बाबा विश्वनाथ जब झूले पर विराजमान हुए तो श्रद्धालुओं की आंखें उस दिव्य स्वरूप पर ठहर गईं।

ऐसा लगा मानो कैलाश की विराटता वृंदावन की माधुर्य भक्ति में उतर आई हो। त्रिशूलधारी महादेव इस दिन मोरपंखधारी नजर आए। जगत के स्वामी त्रिपुरारी कुंजबिहारी बनकर झूला झूलते दिखे। शिव की गंभीरता और कृष्ण की चंचलता एक ही स्वरूप में समाहित हो गई।

—भजन से गूंज उठा महंत आवास

बाबा विश्वनाथ के ‘हरि’ स्वरूप के दर्शन के दौरान भक्ति और संगीत की ऐसी धारा बही कि पूरा वातावरण कृष्णमय और शिवमय हो उठा। जयपुर के मोहन स्वामी और काशी के पागल बाबा की अगुवाई में गायकों ने भजन प्रस्तुत किया—

“गंगा तीरे झूला झूलें त्रिपुरारी,

बनके आज वो कुंजबिहारी।

हाथ त्रिशूल डमरू चमके,

सोहे मुकुट मोरपंख धारी...”

भजन के इन शब्दों ने सामने साकार हुए अलौकिक स्वरूप को मानो आवाज दे दी। महादेव के हाथों में त्रिशूल और डमरू की दिव्यता थी, तो मस्तक पर मोरपंख की माधुरी। कैलाश का वैराग्य और वृंदावन का प्रेम एक ही स्वरूप में एकाकार दिखाई दिया।

—माखन-मिश्री का लगा भोग, ‘हर-हर महादेव’ और ‘हरे कृष्ण’ से गूंजा परिसर

झूले पर विराजमान बाबा विश्वनाथ को बाल-गोपाल के प्रिय माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया गया। बाबा के इस अद्भुत स्वरूप का दर्शन करने के लिए महंत आवास पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने ‘हरे कृष्णा’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

—ब्रह्ममुहूर्त में हुआ विशेष पूजन

महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि जन्माष्टमी की परंपरा के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में बाबा विश्वनाथ की चल रजत प्रतिमा का विशेष पूजन किया गया। पंडित सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न कराया। सायंकाल संजीव रत्न मिश्र ने बाबा विश्वनाथ का मनोहारी ‘हरी’ स्वरूप में श्रृंगार किया। इसके बाद पारंपरिक लोकगीतों और भजनों के माध्यम से बाबा के चरणों में भावपूर्ण शिवांजलि अर्पित की गई।

—‘बाबा मुस्कुराते हैं तो कृष्ण दिखाई देते हैं’

महंत वाचस्पति तिवारी ने कहा कि श्रीकृष्ण के ‘हरि’ स्वरूप में बाबा विश्वनाथ जब मुस्कुराते हैं तो उनमें कृष्ण दिखाई देते हैं और कृष्ण की बांसुरी में भी शिव का अनहद नाद सुनाई देता है। जन्माष्टमी पर काशी ने इसी अद्भुत एकात्म भाव का दर्शन किया—शिव में कृष्ण और कृष्ण में शिव।

—काशी का शाश्वत संदेश—रूप अनेक, सत्य एक

जन्माष्टमी की यह अनूठी परंपरा काशी के उस शाश्वत आध्यात्मिक दर्शन को जीवंत करती है, जिसमें शिव और विष्णु के बीच कोई भेद नहीं माना जाता। नाम अलग हो सकते हैं, रूप अलग हो सकते हैं और लीलाएं भी अलग हो सकती हैं, लेकिन परम सत्ता एक ही है।

झूले पर मोरपंख धारण किए बाबा विश्वनाथ के ‘हरि’ स्वरूप ने इसी सनातन संदेश को साकार कर दिया—कैलाश और क्षीरसागर के बीच कोई दूरी नहीं, भक्ति के भाव में दोनों एक ही परम सत्य के दो रूप हैं। काशी ने एक बार फिर कहा—रूप अनेक हैं, लेकिन सत्य एक है।——विश्वनाथ धाम में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम

श्री काशी विश्वनाथ धाम में विराजमान अक्षयवट हनुमान मंदिर के अर्चकों ने प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भाद्र मास के अष्टमी तिथि पर शुक्रवार शाम श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बहुत ही धूम-धाम से मनाया । मध्यरात्रि लग्नानुसार नटवर नागर का जन्मोत्सव वैदिक मंत्रों के साथ अर्चक अंकित मिश्रा की देखरेख में मनाया जसएगा। इसके पहले श्रीकृष्ण के विग्रह को पंचामृत स्नान कराकर नूतन वस्त्र धारण कराया गया। सुगंधित पुष्पों से भव्य शृंगार कर मुकुट और रत्न जड़ित हार पहनाया गया। फिर अर्चकों ने महाआरती की। देर शाम भक्तों में पंचामृत व प्रसाद वितरण मंदिर परिवार के नील कुमार मिश्रा, बच्चा पाठक, सतीश गिरी, कमल मिश्रा, राजू पाठक की देखरेख में होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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