बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में स्वदेशी भाप आसवन इकाई शुरू, कृषि-आधारित उद्यमिता काे मिलेगा बढ़ावा

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बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में स्वदेशी भाप आसवन इकाई शुरू, कृषि-आधारित उद्यमिता काे मिलेगा बढ़ावा


—औषधीय व सुगंधित फसलों के प्रसंस्करण से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

वाराणसी, 10 जनवरी (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में औषधीय एवं सुगंधित पौधों से उच्च गुणवत्ता वाले आवश्यक तेलों और औषधीय तत्वों के निष्कर्षण के लिए स्वदेश में विकसित एक अत्याधुनिक भाप आसवन इकाई का शुभारंभ किया गया है। यह पहल वैज्ञानिक प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और कृषि-आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. बी.एम.एन. कुमार की उपस्थिति में इस परियोजना को फार्म इंचार्ज डॉ. शशिधर के.एस. एवं फार्म प्रबंधन समिति द्वारा क्रियान्वित किया गया। इकाई की तकनीकी और उद्यानिकी डिजाइन अतिथि शिक्षक (उद्यानिकी) डॉ. बिपिन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में विकसित की गई।

बीएचयू के जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार यह बहुउद्देशीय भाप आसवन इकाई पामारोसा, जेरैनियम, मेंथा (पुदीना), तुलसी, गुलाब, लैवेंडर, सिट्रोनेला, चमेली, वेटिवर (खस) और चंदन जैसे औषधीय एवं सुगंधित पौधों के कुशल प्रसंस्करण में सक्षम है। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर उगाई गई जैव-सामग्री को मूल्यवान आवश्यक तेलों और औषधीय उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकेगा, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं सृजित होंगी।

यह सुविधा विशेष रूप से स्थानीय उत्पादकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। किसान अब अपनी सुगंधित फसलों का प्रसंस्करण परिसर में न्यूनतम और निर्धारित शुल्क पर करा सकेंगे। इससे न केवल पारदर्शिता और सामर्थ्य सुनिश्चित होगी, बल्कि फसलों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य भी प्राप्त होगा।

प्रति बैच 5 क्विंटल (500 किलोग्राम) प्रसंस्करण क्षमता वाली यह इकाई व्यावहारिक कृषि पैमाने के अनुरूप डिजाइन की गई है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होने से दूरस्थ बाजारों पर निर्भरता कम होगी और कम पानी में उगाई जा सकने वाली उच्च मूल्य वाली सुगंधित फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक स्थिरता को भी बल मिलेगा।

व्यावसायिक निष्कर्षण के साथ-साथ यह इकाई एक सक्रिय अनुसंधान, प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी। यहां छात्रों, किसानों और उद्यमियों को उन्नत कृषि-प्रसंस्करण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अवसर पर आचार्य प्रभारी प्रो. बी.एम.एन. कुमार ने कहा कि यह पहल शैक्षणिक ज्ञान को सामुदायिक लाभ में रूपांतरित करने की बीएचयू की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आवश्यक तेल निष्कर्षण तकनीक तक किसानों की पहुंच सुनिश्चित कर हम उन्हें आय बढ़ाने, टिकाऊ कृषि अपनाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सीधे तौर पर सक्षम बना रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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