आईआईवीआर में बैंगन, टमाटर सहित प्रमुख सब्जी फसलों में ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन

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आईआईवीआर में बैंगन, टमाटर सहित प्रमुख सब्जी फसलों में ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन


10 राज्यों के 30 युवा कृषि उद्यमी पांच दिवसीय प्रशिक्षण में ले रहे हैं हिस्सा

वाराणसी, 07 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) में सब्जी फसलों में नर्सरी प्रबंधन एवं ग्राफ्टिंग तकनीक पर आधारित पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में 10 राज्यों से आए 30 युवा किसान एवं कृषि उद्यमी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन के साथ ग्राफ्टिंग तकनीक का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनंत बहादुर ने ग्राफ्टिंग तकनीक के महत्व, उपयोगिता एवं इससे होने वाले लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राफ्टेड पौधों के उपयोग से मृदा जनित रोगों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। साथ ही, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पौधों की बेहतर स्थापना, वृद्धि और उत्पादन सुनिश्चित करने में यह तकनीक उपयोगी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक सब्जी उत्पादन में ग्राफ्टिंग तकनीक उत्पादकता, गुणवत्ता और किसानों की लाभप्रदता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने ग्राफ्टिंग तकनीक को किसानों के खेतों तक व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों का प्रभावी प्रसार तभी संभव है जब कृषि उद्यमी स्वयं इन तकनीकों को अपनाएं, उनके लाभों का अनुभव करें और दूसरे किसानों को भी इनके प्रति जागरूक करें।

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कृषि उद्यमियों को ग्राफ्टिंग तकनीक के ‘क्यों, कैसे और लाभ’ के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राफ्टिंग के माध्यम से पौधों में मृदा जनित रोगों के प्रति सहनशीलता बढ़ाने, प्रतिकूल परिस्थितियों में बेहतर पौध स्थापना तथा गुणवत्तापूर्ण और अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने ग्राफ्टेड पौधों के चयन, उचित रोपण, पौधों की देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में भी प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण एवं स्वस्थ पौध तैयार करने, बीज के चयन एवं उपचार, नर्सरी की वैज्ञानिक तैयारी, बुवाई, सिंचाई एवं पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा पौधों की देखभाल से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा बैंगन, टमाटर समेत प्रमुख सब्जी फसलों में ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन अभ्यास कराया जाएगा।

प्रतिभागियों को रूटस्टॉक एवं सायन के उचित चयन, ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधि, ग्राफ्ट यूनियन तैयार करने, ग्राफ्टेड पौधों की देखभाल तथा खेत में रोपण एवं उसके बाद के प्रबंधन की जानकारी भी दी जा रही है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे मृदा जनित रोगों तथा विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सहनशील होते हैं। इससे फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार के साथ किसानों की आय और लाभप्रदता बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। कार्यक्रम में डॉ. ए.एन. सिंह और डॉ. डी.पी. सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आत्मानंद त्रिपाठी ने किया।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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