नहीं रहे काशी के हठयोगी डॉ. राकेश पांडेय,योग प्रेमी शोकाकुल,हरिश्चंद्र घाट पर अन्तिम संस्कार
—अमेरिका, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका, रूस आदि देशों में भारतीय योग का प्रदर्शन किया था
वाराणसी,14 अप्रैल (हि.स.)। धर्म नगरी काशी के प्रसिद्ध हठयोगी एवं ‘योग ऋषि’ के नाम से विख्यात डॉ. राकेश पांडेय (61) का मंगलवार तड़के निधन हो गया। वह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती थे। परिजनों के अनुसार, देर रात सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. पांडेय के निधन का समाचार मिलते ही उनके शिष्य और शुभचिंतक नगवां स्थित गंगोत्री विहार कॉलोनी के उनके आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए जुटने लगे। दोपहर बाद उनके आवास से अंतिम यात्रा निकाली गई, जो मोक्षस्थली हरिश्चंद्र घाट पहुंची। वहीं, उनकेे छोटे पुत्र योगेश पांडेय ने मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया। अपने पीछे वह पत्नी, दो पुत्र और दो पुत्रियां छोड़ गए हैं।
डॉ. राकेश पांडेय, हठयोग के प्रख्यात साधक रहे योगीराज पं. राजबली मिश्र के प्रिय शिष्य थे। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भारतीय योग, विशेषकर हठयोग, को देश-विदेश में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह अमेरिका, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका और रूस सहित कई देशों में योग का प्रदर्शन कर चुके थे। पेशे से हिंदी के अध्यापक रहे डॉ. पांडेय मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज में कार्यरत थे। शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने योग साधना और उसके प्रचार-प्रसार को जीवन का ध्येय बनाया।
उनके निधन पर योग जगत और समाज के विभिन्न वर्गों में शोक की लहर है। प्रख्यात योग साधक विजय प्रकाश मिश्र, साहित्यकार डॉ. जयप्रकाश मिश्र तथा समाजसेवी रामयश मिश्र सहित अनेक विशिष्टजनों ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे योग क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
योगी विजय प्रकाश मिश्रा ने बताया कि योग ऋषि डॉ. राकेश पांडेय उनके पिता हठ योगी योगीराज पं. राजबलि मिश्र के प्रिय शिष्य रहे। उनके पिता पं.राजबलि मिश्र ने पहली बार माउन्ट एवरेस्ट फतह करने वाले सर एडमंड हिलेरी की 180 हार्स पावर की जेट नौका को हठयोग से रोककर वहां मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया था और भारतीय योग खासकर हठयोग का पूरी दुनिया में परचम लहराया था। खुद सर एडमंड हिलेरी ने ओसन टू स्काई में (आकाश से पाताल तक गंगा)में योगीराज पं. राजबलि मिश्र से प्रभावित होकर भारतीय योग के इस विहंगम पक्ष को लिखा है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

