संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा की आत्मा : प्रो.सदाशिव कुमार द्विवेदी

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संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा की आत्मा : प्रो.सदाशिव कुमार द्विवेदी


—इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के क्षेत्रीय केन्द्र में ग्रंथ लोकार्पण समारोह

वाराणसी, 21 अप्रैल (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग कला संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा की आत्मा है। इस ग्रंथ के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार संस्कृत शब्दावली ने विभिन्न भारतीय भाषाओं को समृद्ध किया है। प्रो. द्विवेदी मंगलवार अपरान्ह इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के करौंदी स्थित क्षेत्रीय केन्द्र में आयोजित “इंडियन हेरिटेज ऐज़ रिफ्लेक्टेड इन संस्कृत वर्ड्स एंड डिसेंडेंट्स” शीर्षक ग्रंथ के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस प्रकार के शोध कार्यों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के पुनरुत्थान के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

समारोह में विद्याश्री न्यास, वाराणसी के सचिव डॉ दयानिधि मिश्र ने कहा कि ग्रंथ भारतीय भाषिक परम्परा के विकास को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। यह सम्पूर्ण विश्व में शब्द की यात्रा के माध्यम से भारत की ख्याति को रेखांकित करेगा। कार्यक्रम में ग्रंथ-लेखक राष्ट्रपति सम्मान से पुरस्कृत, डॉ० सुद्युम्न आचार्य ने बताया कि उनका प्रयास रहा है कि संस्कृत के माध्यम से भारतीयता के मूल तत्वों को पुनः सामने लाया जाए। उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ वर्षों के शोध, अध्ययन एवं संग्रह का परिणाम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. विजयशंकर शुक्ल (निदेशक, पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी) ने की। इसके पहले कला केन्द्र के निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत कर ग्रंथ की महत्ता को बताया।

उन्होंने कहा कि यह कृति भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहनता को संस्कृत शब्दों एवं उनकी सुदीर्घ परम्पराओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। यह ग्रंथ न केवल भाषिक अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत है, अपितु भारतीय परम्परा, दर्शन और सांस्कृतिक निरंतरता का सशक्त दस्तावेज भी है। कार्यक्रम में प्रो० शरदिन्दु त्रिपाठी, समन्वयक, भारत अध्ययन केन्द्र, आचार्या नन्दिता शास्त्री (प्राचार्या), डॉ० प्रीति विमर्शिनी (पाणिनि कन्या महाविद्यालय), डॉ० प्रवीण गटला (भाषाविज्ञान विभाग, बीएचयू), डॉ० सुखदा (आईआईटी), डॉ० प्रभाकर उपाध्याय (प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं कला विभाग), डॉ० प्रियंका (भारत कला भवन) को स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। कार्यक्रम में डॉ० प्रवीण गटला (भाषा विज्ञान), डॉ० सुखदा (आईआईटी) ने विचार प्रकट किया। समारोह का संचालन कला केन्द्र के परियोजना समन्वयक, डॉ. रजनीकान्त त्रिपाठी, संस्कृत विभाग, कला संकाय, बीएचयू के डॉ. शिवलोचन शाण्डिल्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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