गेट 2027 की पात्रता योग्यता में पहली बार आयुर्वेद स्नातक सम्मिलित, आयुर्वेद जगत में हर्ष

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वाराणसी, 10 सितंबर (हि.स.)। गेट 2027 (ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग) की पात्रता योग्यता में पहली बार आयुर्वेद स्नातक (बीएएमएस) को भी सम्मिलित किया गया है। इसको लेकर आयुर्वेद जगत में हर्ष का माहौल है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो.के. एन. मूर्ति का कहना है कि गेट की परीक्षा में आयुर्वेद की मान्यता एवं इनके पाठ्यक्रमों में आयुर्वेद स्नातकों का प्रवेश, आयुर्वेद चिकित्सा के सैद्धांतिक पक्ष का वैज्ञानिक करण करने में सक्षम है। प्रोफेसर मूर्ति ने इस उपलब्धि के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है।

संकाय के रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने बताया कि भारत सरकार के नीति आयोग एवं अन्य कई सम्बन्धित उच्चीकृत शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थाओं से यह नियमित मांग की जा रही थी कि वे गेट टेस्ट की परीक्षा में आयुर्वेदिय योग्यता के स्नातकों को भी सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान करें। जिससे की आयुर्वेद स्नातक भी इन तकनीकी शैक्षणिक संस्थाओं के मास्टर (पोस्ट ग्रेजुएट) पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले कर आयुर्वेदिय सिद्धांतों का वैज्ञानिक प्रामाणिकता प्रदान कर सकें। प्रसन्नता का विषय है कि केंद्रीय संस्थानों ने गेट 2027 की परीक्षा में इसकी अनुमति प्रदान कर दी है। बीएएमएस का विद्यार्थी अपने चतुर्थ वर्ष में गेट 2027 की परीक्षा में सम्मिलित हो सकेगा, और उनमें प्राप्त अंकों के आधार पर आगामी तीन वर्षों ( शैक्षणिक सत्रों ) तक प्रवेश ले सकता है। तव्य है कि गेट 2027 फरवरी माह में भारतीय तकनीकि संस्थान -मद्रास, चेन्नई के द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस परीक्षा के लिये आवेदन प्रक्रिया प्रारम्भ है। प्रो. आनंद चौधरी ने आईआईटी मद्रास से गेट 2027 की सूचना पुस्तिका में केंद्र सरकार तथा संबंधित हितधारकों द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुरूप बीएएमएस स्नातकों की पात्रता को स्पष्ट रूप से प्रकाशित करने का आग्रह, पत्र लिख कर किया है।

——बीएएमएस एक वैधानिक व्यावसायिक योग्यता

प्रतिनिधित्व में यह भी रेखांकित किया गया है कि बीएएमएस एक वैधानिक व्यावसायिक योग्यता है, जो नेशनल कमीशन फार इंडियन सिस्टम आफ मेडिसीन एक्ट, 2020 के अंतर्गत विनियमित है।

इस वैधानिक एवं नियामकीय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि जहां किसी गेट पेपर अथवा संबंधित उच्च शिक्षा/अनुसंधान कार्यक्रम की शैक्षणिक पात्रता बीएएमएस स्नातकों को आवेदन करने की अनुमति देती है, वहां बीएएमएस को स्पष्ट रूप से पात्र योग्यता के रूप में उल्लेखित किया जाना चाहिए। उचित शैक्षणिक पृष्ठभूमि रखने वाले आयुर्वेद स्नातक जैव-चिकित्सा विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल साइंसेज, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान में योगदान कर सकते हैं।

प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने आईआईटी मद्रास के रजिस्ट्रार को संबोधित पत्र में कहा है कि है कि पात्रता संबंधी अस्पष्टता का व्यावहारिक प्रभाव भी पड़ सकता है। कई उम्मीदवार केवल इस कारण आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं क्योंकि उन्हें यह स्पष्ट नहीं होता कि उनकी स्नातक डिग्री संबंधित गेट पेपर के लिए स्वीकार्य है या नहीं। दूसरी ओर, आवेदन की जांच अथवा प्रवेश के चरण में पात्रता को लेकर उत्पन्न अस्पष्टता से अभ्यर्थियों और संस्थानों दोनों को कठिनाई हो सकती है। इसीलिए आईआईटी मद्रास तथा गेट के सक्षम अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि जहां शैक्षणिक रूप से उचित हो, वहां “बैचलर आफ आर्युवेदिक मेडिसीन एंड सर्जरी (बीएएमएस)” को अन्य लागू चिकित्सा अथवा व्यावसायिक योग्यताओं के साथ स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया जाए।

—पारदर्शी एवं स्पष्ट पात्रता व्यवस्था की आवश्यकता

प्रतिनिधित्व में आईआईटी मद्रास और व्यापक आईआईटी प्रणाली द्वारा अंतर्विषयी उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा गया है कि बीएएमएस की पात्रता के संबंध में स्पष्टता प्रदान करने से योग्य आयुर्वेद स्नातकों को राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की संभावनाओं को समझने में सहायता मिलेगी।

प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने सक्षम अधिकारियों से आग्रह किया है कि मामले पर शीघ्र विचार करते हुए गेट 2027 की पात्रता संबंधी प्रोविजन में आवश्यक स्पष्टीकरण, संशोधन अथवा कॉरिजेन्डम जारी किया जाए और जहां आवश्यक हो, बीएएमएस की पात्रता को स्पष्ट रूप से प्रकाशित किया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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