वाराणसी में गंगा में बढ़ती डूबने की घटनाओं पर प्रशासन सतर्क,श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने की चेतावनी

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वाराणसी में गंगा में बढ़ती डूबने की घटनाओं पर प्रशासन सतर्क,श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने की चेतावनी


— गंगा के घाट, जीवन की सुरक्षा और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

— जीवन अनमोल है, एक क्षण की असावधानी पूरे परिवार को आजीवन पीड़ा दे सकती है

वाराणसी, 03 जून (हि.स.)। धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा नदी में लगातार बढ़ रही डूबने की घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। बुधवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानन्द गुप्ता ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करते हुए गहरे पानी में न जाने तथा केवल सुरक्षित एवं चिन्हित घाटों पर ही स्नान करने की अपील की।

अपर जिलाधिकारी ने बताया कि वाराणसी में लगभग 84 घाट हैं, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि जिले में विभिन्न आपदाओं से होने वाली मौतों की तुलना में डूबने से होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक है। हर वर्ष अनेक परिवार थोड़ी सी लापरवाही और असावधानी के कारण अपने प्रियजनों को खो देते हैं। डूबने की प्रत्येक घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती, बल्कि एक परिवार के सपनों, आशाओं और भविष्य का समाप्त हो जाना भी होता है। उन्होंने कहा कि “एक छोटी सी सावधानी, एक पूरा जीवन बचा सकती है।”

डूबने की घटनाओं के प्रमुख कारण

प्रशासन द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि अधिकांश हादसे मानवीय लापरवाही के कारण होते हैं। इनमें असुरक्षित एवं चिन्हित न किए गए घाटों पर स्नान करना, नदी की गहराई और तेज प्रवाह का सही अनुमान न लगा पाना, सेल्फी और वीडियो बनाने के दौरान जोखिम उठाना, तैरना न जानते हुए भी गहरे पानी में चले जाना प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा कम आयु के बच्चों और युवाओं का बिना अभिभावक के नदी में जाना, नशे की हालत में घाट या नाव के पास पहुंचना, लाइफ जैकेट का प्रयोग न करना, ओवरलोडेड अथवा अनधिकृत नावों में यात्रा करना तथा खराब मौसम में नौका विहार करना भी हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि डूबने वाले लोगों में बड़ी संख्या 25 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवाओं की होती है, जो समाज और अभिभावकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम

अपर जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों और युवाओं की सुरक्षा में अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को अकेले घाटों पर न जाने दें और कम आयु के बच्चों को बिना निगरानी स्नान न करने दें।

उन्होंने कहा कि बच्चों को नदी के खतरों के प्रति लगातार जागरूक किया जाना चाहिए तथा सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचने की सीख दी जानी चाहिए।

केवल सुरक्षित घाटों पर ही करें स्नान

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य विभागों द्वारा कुछ घाटों को सुरक्षित घोषित किया गया है, जहां सुरक्षा कर्मी, बचाव उपकरण और निगरानी व्यवस्था उपलब्ध रहती है।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि वे केवल चिन्हित एवं सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें। अनजान, निर्जन और असुरक्षित घाटों पर जाना जानलेवा साबित हो सकता है।

नौका दुर्घटनाओं को लेकर भी चेतावनी

अपर जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में नाव पलटने और नौका दुर्घटनाओं की कई घटनाएं सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में ऐसी दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश नौका दुर्घटनाएं मानवीय भूलों के कारण होती हैं। नाव में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना, लाइफ जैकेट का प्रयोग न करना, अनुभवहीन नाविकों द्वारा संचालन, अनधिकृत नावों का उपयोग, तकनीकी खराबियां और मौसम संबंधी चेतावनियों की अनदेखी इसके प्रमुख कारण हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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