गंगा में बिरयानी खाने के मामले की अंजुमन इन्तेज़ामिया ने की निंदा, नाराजगी भी जताई

WhatsApp Channel Join Now

मसाजिद के संयुक्त सचिव बोले—इस्लाम में इसके लिए कहीं जगह नहीं

वाराणसी, 17 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी स्थित पवित्र गंगा नदी में नौका पर सवार होकर रोजा इफ्तार करने और बिरयानी खाने के मामले को लेकर अंजुमन इन्तेज़ामिया मसाजिद कमेटी ने भी नाराजगी जताई है। मसाजिद के संयुक्त सचिव एस एम यासीन ने मंगलवार को इस प्रकरण को निन्दनीय कृत्य बताया।

बयान जारी कर मौलाना एसएम यासीन ने कहा कि आज ज्ञात हुआ कि कुछ जाहिल नाव पर रोज़ा इफ्तार कर रहे थे। इस्लाम में इसके लिए कहीं जगह नहीं है। रोजा इफ्तार एक शुद्ध धार्मिक कार्य है। यह कोई सैर नहीं या पिकनिक नहीं है। इफ्तार के बाद तुरंत बाद मग़रिब की नमाज़ ज़रूरी है। इन जाहिलों को इनके घर वालों ने क्या तरबियत दिया है?। इस्लाम मज़हब को बदनाम करने का मौक़ा दिया है। इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाए कम है। हम उम्मीद करते है आलिम भी इस विषय पर अपना विचार साझा करने की ज़हमत उठाएंगे। आज की खबर बेहद तकलीफदेह है। बेशक मुसलमानों का शोषण करने के लिए इनके खिलाफ एफआईआर हुई है, इसमें कोई दो राय नहीं है। भाजपा और उनके कार्यकर्ताओं को ऐसा मौका आखिर इन जैसे जाहिल लोगों से ही तो मिलता है और मिल गया।

बताते चले गंगा नदी में नौका पर सवार होकर रोजा इफ्तार करने और बिरयानी खाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) वाराणसी महानगर के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने इफ्तार पार्टी में शामिल सभी 14 आरोपित युवकों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार युवकों पर आरोप है कि सभी इफ्तारी के बाद नॉनवेज खाते हुए इसकी हड्डियां गंगा में फेंक रहे थे। भाजयुमो नेता ने तहरीर में लिखा है कि मां गंगा सनातन धर्म अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से माँ गंगा के जल का आचमन करने आते हैं। मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा माँ गंगा की पावन धारा में नाव पर बैठकर इफ्तार के समय चिकन बिरयानी खाना और उसके अवशेष गंगा में फेंकना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय कृत्य है। इस कृत्य से सनातन धर्म के लोगों की भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा है ।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Share this story