वाराणसी : पर्यावरण संरक्षण के लिए दशाश्वमेध घाट पर हवन, श्रद्धालु भी हुए शामिल

WhatsApp Channel Join Now
वाराणसी : पर्यावरण संरक्षण के लिए दशाश्वमेध घाट पर हवन, श्रद्धालु भी हुए शामिल


वाराणसी, 13 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में शनिवार को दशाश्वमेध घाट पर पर्यावरण सरंक्षण एवं मानसिक शांति के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन पूजन किया गया। घाट पर गंगा आरती कराने वाली संस्था गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में अर्चकों के साथ नमामि गंगे के स्वयं सेवकों ने भी हवन पूजन में भागीदारी की। हवन पूजन में आम श्रद्धालु भी शामिल रहे। पूजन में शामिल गंगा सेवक राजेश शुक्ल ने बताया कि गंगा किनारे हवन करना आध्यात्मिक और मानसिक शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी पवित्र तीर्थस्थल या गंगातट पर किए गए हवन का फल सामान्य स्थान की तुलना में करोड़ों गुना अधिक प्राप्त होता है। सनातन धर्म में गंगा को देव नदी माना गया है। गंगा किनारे बैठकर आहुति देने से वातावरण अत्यंत शुद्ध हो जाता है और साधक के शारीरिक एवं मानसिक पापों का नाश होता है। वेदों और पुराणों (जैसे स्कंद पुराण) के अनुसार, गंगा के तट पर किए गए जप, तप, दान और हवन का फल अनंत गुना होता है। यदि हवन का उद्देश्य पितरों की शांति या तर्पण है, तो गंगा किनारे किया गया हवन सीधा पितरों को मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। बहती हुई गंगा और हवन की पवित्र अग्नि (अग्निकर्म) मिलकर वातावरण में उच्च कोटि की सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम है। पर्यावरण संरक्षण में हवन (यज्ञ) की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वैज्ञानिक मान्यताओं और वैदिक परंपरा के अनुसार, हवन सामग्री, घी और औषधीय जड़ी-बूटियों को अग्नि में जलाने से उत्पन्न धुआं एक प्राकृतिक वायु शोधक के रूप में कार्य करता है। यह वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों को नष्ट करके पर्यावरण को शुद्ध करता है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Share this story