वाराणसी : दशाश्वमेघ घाट पर सायंकालीन गंगा आरती में गूंजा गंगा के स्वच्छता का संकल्प

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वाराणसी : दशाश्वमेघ घाट पर सायंकालीन गंगा आरती में गूंजा गंगा के स्वच्छता का संकल्प


— 'हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है'गीत से लोगों को किया गया जागरूक

वाराणसी,05 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर रविवार शाम गंगोत्री सेवा समिति के सायंकाल गंगा आरती में गंगा के स्वच्छता की अलख जगाई गई। घाट पर देश की सांस्कृतिक विरासत और गंगा नदी को देश की आत्मा से जोड़ने वाले गीत 'हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है' से लोगों को स्वच्छता का संकल्प भी दिलाया गया। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने घाट पर गंगा आरती के दौरान देशभक्ति गीत हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है एवं 'ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो गीत को गंगा के तट पर जीवंत किया।

इसके बाद विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के नयनाभिराम दृश्य को देखने के लिए उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा और उनकी सहायक नदियों की स्वच्छता की शपथ ली। राजेश शुक्ला ने बताया कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में जीवन, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। हम उस देश के वासी हैं, जहाँ नदियों को माँ का दर्जा देकर उनका संरक्षण किया जाता है, न कि उन्हें दूषित। यह गीत प्रकृति के सभी जीवों और इंसानों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।

राजेश शुक्ला ने कहा कि यह गीत हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति का हिस्सा है। जहाँ गंगा जैसी नदियाँ बहती हैं, वहाँ की हवा, पानी और धरती की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण मिल सके। आयोजन में समिति के संस्थापक अध्यक्ष पं०किशोरी रमण दुबे (बाबू महाराज), सचिव पं० दिनेश शंकर दुबे, मयंक दुबे आदि ने भी पूरे उत्साह से भागीदारी की।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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