वाराणसी में गंगा खतरे के निशान की ओर, तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता
चेतावनी बिंदु पार कर 70.32 मीटर पहुंचा जलस्तर, दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ाव
—वरुणा नदी में पलट प्रवाह से निचले इलाकों में जलभराव,हालात भयावह होने के कगार पर
वाराणसी, 02 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। चेतावनी बिंदु 70.260 मीटर को पार करने के बाद बुधवार सुबह आठ बजे केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज पर गंगा का जलस्तर 70.28 मीटर दर्ज किया गया। यह दो घंटे बाद सुबह 10 बजे बढ़कर 70.32 मीटर पहुंच गया। गंगा का जलस्तर करीब दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। खतरे का निशान 71.26 मीटर है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाढ़ प्रभावित तटवर्ती और निचले इलाकों में मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
आधी रात के बाद फिर बढ़ा जलस्तर, गलियों और सड़कों तक पहुंचा पानी
मंगलवार शाम जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़ने के बाद कुछ समय के लिए स्थिर हुआ था। इसके बाद करीब 1.50 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की दर से इसमें गिरावट शुरू हुई तो राहत की उम्मीद जगी थी। हालांकि, आधी रात के बाद जलस्तर फिर बढ़ने लगा। मंगलवार रात 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.26 मीटर था, जो बुधवार सुबह तक लगातार बढ़ता गया। गंगा का पानी वाराणसी में अब सभी 84 घाटों को पार कर किनारे स्थित मंदिरों और आसपास के इलाकों में पहुंच गया है। कई जगहों पर पानी गलियों और सड़कों पर बहने लगा है। अस्सीघाट से ऊपर नगवां मोड़ की सड़क तक भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
ग्रामीण इलाकों में भी बिगड़ रहे हालात
गंगा के ढाब क्षेत्र के साथ चौबेपुर और चिरईगांव समेत ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का असर बढ़ रहा है। कई गांव पानी से घिर गए हैं और संपर्क मार्गों पर भी पानी भर गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है। एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि ड्रोन के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर गंगा में सभी प्रकार की नावों का संचालन बंद कर दिया गया है। जल पुलिस की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। श्रद्धालुओं से घाटों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की जा रही है।
वरुणा में पलट प्रवाह से निचले इलाकों में जलभराव
उधर, गंगा के बढ़े जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी दिखाई दे रहा है। गंगा के बाढ़ के पानी का वरुणा में पलट प्रवाह होने से तटवर्ती और निचले इलाकों में स्थिति बिगड़ रही है। वरुणा नदी से जुड़े नालों के जरिए बाढ़ का पानी सलारपुर, पुराना पुल और पुलकोहना क्षेत्र के दर्जनों मकानों में घुस गया है। बाढ़ के कारण कई परिवार अपने घर खाली कर ऊंचे स्थानों पर किराये के कमरों में रहने को मजबूर हैं। कुछ परिवारों ने बाढ़ राहत शिविरों में शरण ली है। दनियालपुर, पंचक्रोशी और रुप्पनपुर सहित अन्य क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
हुकुलगंज से ढेलवरिया तक घरों में घुसा पानी
वरुणा नदी के तटवर्ती हुकुलगंज, बघवानाला, पिपरहवाघाट और ढेलवरिया क्षेत्रों में भी कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई संपर्क मार्ग जलमग्न होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती बनी हुई है।
13 राहत शिविरों में 935 प्रभावित लोग
अपर जिलाधिकारी (वित्त और राजस्व ) ने बताया कि वाराणसी में कुल 13 बाढ़ राहत शिविर सक्रिय हैं। इनमें 219 प्रभावित परिवारों के 935 लोग रह रहे हैं। राहत शिविरों में रह रहे लोगों को दिन में तीन समय पौष्टिक भोजन, नाश्ता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक जिले के करीब 11 मोहल्ले और वार्ड आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं। वरुणा नदी में आई बाढ़ से जिले में कुल 328 परिवारों के 1,388 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित परिवारों को जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों पर विशेष ध्यान
प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दूध, फल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत-बचाव कार्यों को तेज रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत-बचाव कार्यों को सुचारु बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कुल 32 नावों की व्यवस्था की है। इन नावों के माध्यम से जलभराव और बाढ़ में फंसे लोगों को आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
पुलिस, एनडीआरएफ समेत कई विभाग सक्रिय
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, जल पुलिस, एनडीआरएफ और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने गंगा और वरुणा के तटवर्ती तथा संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया है। प्रशासन का कहना है कि गंगा और वरुणा के जलस्तर के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

