मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और जीवनधारा की प्रतीक : स्वामी जीतेन्द्रानंद

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मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और जीवनधारा की प्रतीक : स्वामी जीतेन्द्रानंद


—गंगा दशहरा पर गंगा पूजन एवं काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव की भव्य आरती तथा श्रृंगार

- अविरल-निर्मल और नैसर्गिक गंगा के लिए जनजागरण का आयोजन

वाराणसी, 26 मई (हि.स.)। मां गंगा के प्रति श्रद्धा, सेवा और सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने,अविरल एवं निर्मल गंगा के संकल्प को साकार करने के लिए गंगा दशहरा पर मंगलवार को रामा दल, काशी महानगर ने पंचगंगाघाट पर मां गंगा का पूजन किया।

गंगा पूजन ,दुग्धाभिषेक एवं जागरण के कार्यक्रम में संत-महात्मा एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामन्त्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती के सान्निध्य में मुख्य यजमान श्री काशी विद्वत परिषद के संगठन मन्त्री पं. गोविन्द शर्मा ने सपत्नीक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माँ गंगा का पूजन तथा आरती की। इसके पूर्व काशी कोतवाल बाबा कालभैरव की भव्य मंगला आरती तथा श्रृंगार का आयोजन मन्दिर के महन्त पण्डित वैभव दूबे की ओर से किया गया।

इस अवसर पर स्वामी जीतेन्द्रानन्द ने कहा कि माँ गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और जीवनधारा की प्रतीक हैं। गंगा दशहरा के अवसर पर हम सभी को गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। गंगाजी की सेवा और संरक्षण, राष्ट्र एवं मानवता की सेवा है। इसके पहले रामा दल, काशी महानगर के अध्यक्ष साहिल सोनकर, महामन्त्री द्वय गौरव मालवीय, अर्जित श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष अश्विनी सिंह, अधिवक्ता सचिन कुमार, मन्त्री आदर्श चौरसिया, कोषाध्यक्ष श्याम बरनवाल,कार्यक्रम संयोजक आर्यन पांड्या व अभिषेक चौबे ने सन्त-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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