वाराणसी में गाजी मियां का रखाया लग्न, दरगाह पर चादरपोशी कर दुआएं मांगी

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वाराणसी में गाजी मियां का रखाया लग्न, दरगाह पर चादरपोशी कर दुआएं मांगी


वाराणसी में गाजी मियां का रखाया लग्न, दरगाह पर चादरपोशी कर दुआएं मांगी


आस्ताने की दीवारों पर हल्दी लगे पंजों की छाप लगाई

वाराणसी, 29 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के बड़ी बाजार स्थित हजरत सैयद सलार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह गाजी मियॉ की शादी का सवा महीने का लगन रखने की रवायत रविवार को निभाई गई। दरगाह कमेटी के गद्दीनशीन/सेक्रेटरी हाजी एजाजुद्दीन हाशमी के देखरेख में हल्दी की रस्म-रिवाज निभाई गई। इसमें इलाकाई मुस्लिम समाज की महिलाओं और लोगों ने सहभागिता की।

लग्न रखने के पहले संदलपोशी और चादरपोशी की गई। इसके बाद मजार पर हल्दी का लेपन किया गया। आस्ताने की दीवारों पर हल्दी लगे पंजों की छाप लगाई गई। रस्म होने के बाद कुल शरीफ और सलातो सलाम पढ़ा गया और मुल्क में अमन चैन, खुशहाली की दुआ की गई। गाजी मियां की लग्न के साथ ही उनकी शादी की रस्मों की शुरुआत भी हो गई जो सवा महीने तक चलेंगी।

दरगाह कमेटी के सचिव हाजी एजाजुद्दीन हाशमी, सदर हाजी सिराजुद्दीन हाशमी, नियाजुद्दीन हाशमी, जीशान अहमद के अनुसार फातिहा और चादर पोशी में अकीदतमंदों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। अकीदतमंदों ने गाजी मियां के दरबार में श्रद्धापूर्वक हल्दी लगाई और खुद भी लगवाई। 15 मई को गाजी मियां की पलंगपीढ़ी व मेदनी का कार्यक्रम होगा।

बताते चले कि महमूद गजनवी के सिपहसलार सालार मसूद गाजी मियां का सलारपुरा (बड़ी बाजार) में दरगाह है। यहां प्रतिवर्ष गांजी मिया के विवाह के अवसर पर भारी भीड़ मजार पर जुटती है। इसमें मुस्लिम समुदाय के साथ हिन्दू भी बड़ी सख्या में शामिल होते हैं। गाजी मियां के शादी के तैयारियों में सवा महीने का लगन रखने की रवायत के बाद पलंग-पीढ़ी (बारात की रस्म का जुलूस) बहराइच स्थित दरगाह पर भेजा जाता है। इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की भागीदारी होती है। पलंग पीढ़ी का जुलूस बुनकर मार्केट, काजी सादुल्लापुरा, चौकाघाट, हुकुलगंज, तिराहा, मकबूल आलम रोड, पुलिस लाइन, भोजूबीर होते हुए शिवपुर से बहराइच के लिए वाहन से रवाना होता है। गाजी मियां की शादी के मौके पर मन्नत मांगने बड़ी संख्या में जुटते हैं। इसमें शादी, औलाद व लम्बी बीमारी से मुक्ति आदि मुराद की आस में लोग शामिल होते हैं।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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