वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब, घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की लगातार पेट्रोलिंग

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वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब, घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की लगातार पेट्रोलिंग


वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब, घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की लगातार पेट्रोलिंग


वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब, घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की लगातार पेट्रोलिंग


-अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच जलमग्न, वरुणा के तटवर्ती इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी

वाराणसी, 22 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है। शनिवार सुबह 10 बजे राजघाट स्थित केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 69.17 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। सीडब्ल्यूसी के अनुसार वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है। ऐसे में अगले कुछ घंटों में जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर सकता है। गंगा में खतरे का निशान 71.262 मीटर और उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 73.901 मीटर है।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। बढ़ते पानी ने घाटों को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया है और तटवर्ती क्षेत्रों की गलियों तथा निचली बस्तियों तक पानी पहुंचने लगा है। अस्सी घाट पर होने वाला ‘सुबह-ए-बनारस’ कार्यक्रम का मंच भी जलमग्न हो गया है। गंगा का पानी प्राचीन शीतलाघाट स्थित माता शीतला मंदिर के गर्भगृह को डुबोते हुए उपर पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने के बाद मंदिर के पुजारी ने माता शीतला की चल प्रतिमा को अहिल्याबाई घाट स्थित अहिलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। बाढ़ के कारण घाटों की रौनक फीकी पड़ गई है और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

घाटों पर नाव संचालन पर रोक, एनडीआरएफ और जल पुलिस की पेट्रोलिंग

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट और एनडीआरएफ की टीमें ड्रोन कैमरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं। दशाश्वमेध जल पुलिस चौकी के प्रभारी सुधीर त्रिपाठी के अनुसार, घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गंगा में नाव संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों से लगातार गश्त कर रही हैं और लोगों को सतर्क किया जा रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

मणिकर्णिका की गलियों में पहुंचा पानी

गंगा का पानी मणिकर्णिका घाट की गलियों में भर गया है। इसके चलते शवदाह की व्यवस्था घाट के ऊपरी हिस्से की छत पर की जा रही है। अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे लोग नाव के सहारे छत तक जा रहे हैं। हरिश्चंद्र घाट पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जलस्तर बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि घाट के ऊपरी हिस्से की गलियों में शवदाह की व्यवस्था की जा रही है।

वरुणा नदी के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती इलाकों में खतरा

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी दिखाई देने लगा है। वरुणा का पानी बढ़ने से तटवर्ती इलाके बाढ़ की चपेट में आने लगे हैं। सलारपुर रेलवे लाइन के पास तक पानी पहुंच गया है और आसपास के कई मकानों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पुरानापुल का नाला भी पानी से भर गया है। नक्खीघाट, हुकुलगंज, बघवानाला, ढेलवरिया, पिपरहवाघाट और चौकाघाट समेत वरुणा के तटवर्ती क्षेत्रों में कई मकान पानी से घिरने लगे हैं। तटीय बस्तियों में पानी घुसने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। वरुणा किनारे बने कई मकानों में लोग निचले तल को छोड़कर दूसरे तल पर रहने को मजबूर हैं।

किसानों को फसल और पशुचारे की चिंता

गंगा का पानी जनपद के ढाब क्षेत्र के सोता में भी भरने लगा है और अब खेतों तक पहुंच रहा है। इससे किसानों को सब्जियों की फसल डूबने की चिंता सताने लगी है। रमचंदीपुर, रेता पार, गोबरहां, रामपुर, मोकलपुर, चांदपुर, मुस्तफाबाद और छितौना जाल्हूपुर समेत ढाब क्षेत्र के किसानों के सामने पशुओं के चारे और भूसे का संकट भी खड़ा हो गया है।

गंगा और वरुणा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और राहत एजेंसियों को अलर्ट रखा गया है। एनडीआरएफ, जल पुलिस और पुलिस की टीमें घाटों तथा प्रभावित तटवर्ती इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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