वाराणसी में गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव का रूख, प्राचीन शीतला मंदिर के गर्भगृह में पहुंचीं लहरें
-बढ़ाव का यहीं रूख रहा तो 48 घंटे के अंदर लहरें चेतावनी बिंदु को पार कर जाएंगी
वाराणसी, 19 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में गंगा और उसकी सहायक नदी वरूणा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही जोरदार बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में हो रही वृद्धि से तटवर्ती क्षेत्र के लोगों में संभावित बाढ़ को लेकर धुकपुकी बढ़ गई है। गंगा की लहरें प्राचीन शीतलाघाट को अपने आगोश में लेते हुए माता शीतला के गर्भगृह में प्रवेश कर गई हैं।
मंदिर के पुजारी ने सुबह घुटने भर पानी में खड़े होकर माता का विधिवत पूजा अर्चना के बाद मंगला आरती की। गंगा में बढ़ाव को देखते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं के आगमन पर रोक लगाई गई है। नमोघाट पर भी गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियां पार कर अब नमो घाट पर बने विशाल ‘नमस्ते’ स्कल्पचर के आगे तक पहुंच गया है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दशाश्वमेध और शीतला घाट की गंगा आरती का स्थान बदलकर छत पर कर दिया गया है। गंगा में बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया है। छत पर सीमित स्थान होने के कारण आरती में भी सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को ही शामिल होने दिया जा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बुधवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 67.68 मीटर, पूर्वाह्न 10 बजे गंगा का जलस्तर 67.78 मीटर दर्ज किया गया। पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है। इसके पहले मंगलवार को शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 67.06 मीटर और शाम छह बजे 67.14 मीटर दर्ज किया गया। वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि गंगा का यही रुख रहने पर अगले 48 घंटों में गंगा चेतावनी बिंंदु को पार कर सकती है।
दशाश्वमेध जलपुलिस चौकी के प्रभारी के अनुसार घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए उनकी सुरक्षा के मद्देनजर गंगा में नाव संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ही इस संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। लोगों को सतर्क किया जा रहा है। उधर, गंगा का पानी मणिकर्णिका घाट की गलियों तक पहुंच गया है। इसके चलते यहां शवदाह अब घाट की ऊपरी छत पर किया जा रहा है। हरिश्चंद्र घाट की स्थिति भी चिंताजनक है। जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है और घाट की ऊपरी जगहों पर ही शवदाह की व्यवस्था की जा रही है। गंगा में बढ़ाव के बाद वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। सलारपुर रेलवे लाइन के पास तक पानी पहुंचने के बाद आसपास के मकानों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। प्रभावित क्षेत्र के लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

