गंगा के बढ़ते जलस्तर से वाराणसी के घाटों की रौनक फीकी, शीतला मंदिर का गर्भगृह डूबा

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गंगा के बढ़ते जलस्तर से वाराणसी के घाटों की रौनक फीकी, शीतला मंदिर का गर्भगृह डूबा


गंगा के बढ़ते जलस्तर से वाराणसी के घाटों की रौनक फीकी, शीतला मंदिर का गर्भगृह डूबा


—दशाश्वमेध और शीतला घाट की गंगा आरती छत पर, गंगा आरती देखने से श्रद्धालु हुए वंचित

वाराणसी, 20 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने वाराणसी के तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण गंगा के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के साथ बढ़ाव जारी है।

गुरुवार रात आठ बजे राजघाट स्थित केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 68.38 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर करीब 1.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। गंगा की लहरें प्राचीन शीतलाघाट स्थित माता शीतला मंदिर तक पहुंच गई हैं। मंदिर का गर्भगृह भी पानी में डूब गया है। सुरक्षा को देखते हुए श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। मंदिर के पुजारियों ने माता शीतला की चल प्रतिमा को अहिल्याबाई घाट स्थित अहिलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। उधर,गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियां पार कर नमो घाट पर बने विशाल ‘नमस्ते’ स्कल्पचर के आगे तक पहुंच गया है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के चलते घाटों की रौनक भी फीकी पड़ गई है और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।

—छत पर हो रही गंगा आरती

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दशाश्वमेध और शीतला घाट की गंगा आरती का स्थान बदलकर छत पर कर दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छत पर सीमित संख्या में ही लोगों को आरती में शामिल होने की अनुमति दी जा रही है।

—जलस्तर चेतावनी बिंदु से 1.882 मीटर नीचे

सीडब्ल्यूसी के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर फिलहाल 70.262 मीटर के चेतावनी बिंदु से 1.882 मीटर नीचे है। गंगा में खतरे का निशान 71.262 मीटर और उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 73.901 मीटर है। गुरुवार सुबह 10 बजे जलस्तर 68.35 मीटर था। इससे पहले बुधवार सुबह आठ बजे 67.68 मीटर और सुबह 10 बजे 67.78 मीटर दर्ज किया गया था।

—गंगा में नाव संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक

दशाश्वमेध जल पुलिस चौकी के प्रभारी के अनुसार घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गंगा में नाव संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ही नाव संचालन के संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं तथा लोगों को सतर्क किया जा रहा है।

—मणिकर्णिका की गलियों तक पहुंचा पानी

गंगा का पानी मणिकर्णिका घाट की गलियों तक पहुंच गया है। इसके चलते शवदाह की व्यवस्था घाट की ऊपरी छत पर की जा रही है। हरिश्चंद्र घाट पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है और ऊपरी हिस्सों में ही शवदाह की व्यवस्था की जा रही है।

—वरुणा के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी दिखाई देने लगा है। वरुणा का पानी बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन रही है। सलारपुर रेलवे लाइन के पास तक पानी पहुंच गया है और आसपास के कई मकानों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। प्रभावित लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

—किसानों को फसल और पशुचारे की चिंता

जनपद के ढाब क्षेत्र के सोता में भी गंगा का पानी भर गया है। जलस्तर बढ़ने से किसानों को सब्जियों की फसल डूबने की चिंता सताने लगी है। रमचंदीपुर, रेता पार, गोबरहां, रामपुर, मोकलपुर, चांदपुर, मुस्तफाबाद और छितौना जाल्हूपुर के किसानों की परवल, नेनुआ, भिंडी और कोहड़ा जैसी फसलों पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, ढाब क्षेत्र में पशुओं के लिए चारा और भूसा उपलब्ध कराने की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।

—प्रशासन और राहत एजेंसियां अलर्ट

गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और राहत एजेंसियां सतर्क हैं। जल पुलिस तथा एनडीआरएफ की टीमें घाटों और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। तटवर्ती इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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