वाराणसी परिक्षेत्र में गंगा के बढ़े जलस्तर पर जिला प्रशासन की नजर, आपदा प्रबंधन की बैठक
—तटबंधों की नियमित निगरानी तथा आपातकालीन संचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर विशेष बल
वाराणसी, 31 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा और उसकी सहायक वरूणा नदी के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि से संभावित बाढ़ की स्थिति पर जिला प्रशासन की सतर्क नजर है। शुक्रवार शाम वाराणसी परिक्षेत्र के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन एवं संभावित बाढ़ की स्थिति के दृष्टिगत एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परिक्षेत्र से संबंधित जनपदों के जिलाधिकारी, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में कमिश्नर ने बाढ़ एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभागों को पूर्ण सतर्कता एवं समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, नावों एवं राहत सामग्री की उपलब्धता, बाढ़ चौकियों की सक्रियता, तटबंधों की नियमित निगरानी तथा आपातकालीन संचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर विशेष बल दिया।
मंडलायुक्त ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जाएं तथा आमजन को समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि जलस्तर एवं मौसम की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखते हुए आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। मंडलायुक्त ने निर्देशित किया कि बाढ़ के दौरान प्रभावित क्षेत्रों तथा चौकियों पर खाने-पीने की वस्तुओं को तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराएं तथा गोवंश की सुरक्षित व्यवस्था हेतु अभी से प्लान तैयार करें। पशुओं के टीकाकरण नियमित रूप से होता रहे, उचित साफ - सफाई की भी व्यवस्था हो जिससे किसी बीमारी को फैलने से रोका जा सके। बाढ़ चौकियों में सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित हो। मेडिकल टीम, पुलिस गश्त, लेखपाल की मौजूदगी तथा महिला स्टाफ की तैनाती रोस्टर वाईज होती रहनी चाहिए, इसमें कोई कोताही नहीं होने पाए। गुणवत्ता की चेकिंग हेतु टीम लगातार कार्य करते रहे। बच्चों हेतु दूध की पर्याप्त व्यवस्था के साथ चना व गुड़ की उचित मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित हो। सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ समय से लोगों को भोजन उपलब्ध होने पाए इसको भी सुनिश्चित किया जाए।
एडीएम एफआर वाराणसी सदानंद गुप्ता व जौनपुर के अफसरों ने अपने जिलों की तैयारियों को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बताया कि इससे बचाव के लिए पूरी तैयारी की गई है। समीक्षा बैठक में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े जिलाधिकारी चंदौली चन्द्रमोहन गर्ग ने बताया कि जिले में बाढ़ संभावित गांवों की पहचान कर ली गयी है। स्थानीय नाव संचालकों से वार्ता करते हुए नावों की व्यवस्था कर ली गई है। पिछले वर्ष 41 बाढ़ चौकियों को बनाया गया था । जिसमें 16 क्रियाशील हुई थीं। कुल 215 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे, जिसको देखते हुए सभी उचित व्यवस्थाएं कर ली गई हैं।
जिलाधिकारी गाजीपुर अनुपम शुक्ला ने बताया कि पिछले वर्ष 161 गांव बाढ़ से प्रभावित थे। जिसमें 27 गांव कटऑफ की श्रेणी में आते हैं। जिसको देखते हुए इस वर्ष सभी टेंडर कर लिये गये हैं, 1200 लाइफ़ जैकेट वितरित किया गया है। कुल 228 नावों की व्यवस्था की गई है। जिले में सिंचाई विभाग की 6 परियोजनाएं गतिमान थीं जिनको पूरा करा लिया गया है। नियमित टीकाकरण लगातार चल रहा है। बैठक में विभागवार तैयारियों की समीक्षा की गई तथा सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जनहानि एवं संपत्ति की क्षति को न्यूनतम रखने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के अनुरूप कार्य करने को कहा गया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

