वाराणसी में स्वामी विवेकानंद के प्रवास स्थल का डिज़ाइन बदलेगा, हटेगा सुलभ काम्पलेक्स
—जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने प्रवास स्थल का लिया जायजा
-इस स्थल पर स्वामी विवेकानंद बीमारी की अवस्था में रूके थे
वाराणसी, 15 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अर्दली बाज़ार स्थित स्वामी विवेकानंद के प्रवास स्थल (गोपाललाल विला ) को सरंक्षित करने के लिए संघर्ष करने वाली संस्था विवेकानंद प्रवास स्थल संरक्षण समिति की पहल अंततोगत्वा मूर्त रूप लेने लगी है। मंगलवार अपरान्ह जिलाधिकारी वाराणसी सत्येन्द्र कुमार विवेकानन्द प्रवास स्थल पहुंचे और जगह का स्थलीय निरीक्षण किया।
यह जानकारी मिलते ही बनारस बार के पूर्व महामंत्री अधिवक्ता नित्यानन्द राय, विनोद पांडेय भैयाजी,गौतम झा ,मिलिन्द श्रीवास्तव , रणजीत राय,सेन्ट्रल बार के पूर्व महामंत्री सुरेन्द्र पांडेय,ब्रजेश मिश्रा, राजीव सिन्हा,संजीवन यादव ,विपिन शुक्ला आदि अधिवक्ता गोपाल लाल विला पहुंच गये। विवेकानंद प्रवास स्थल को संरक्षित करने की दिशा में जिलाधिकारी ने पूरे स्थल का निरीक्षण किया। अधिवक्ताओं के दल ने जिलाधिकारी से प्रवास स्थल सरंक्षण को लेकर अपनी बात रखी। विवेकानंद प्रवास स्थल संरक्षण समिति के पदाधिकारी अधिवक्ता नित्यानन्द राय ,विनोद पांडेय भैयाजी ने बताया कि जिलाधिकारी ने गोपाल लाल विला को कम्पोजिट विद्यालय की तरफ उत्तर दक्षिण दिशा में न बनाकर पूरब पश्चिम बनाने पर सहमति जताई। इस पर अधिवक्ताओं ने भी सहमती दिखाई।
पदाधिकारी नित्यानंद राय के अनुसार, स्वामी विवेकानंद के प्रवास स्थल से सटा कर बाउन्ड्रीवाल बनाने के कार्य का विरोध कर अधिवक्ताओं ने पिछले पन्द्रह दिनों से काम रोक रखा था। गतिरोध दूर करने के लिये जिलाधिकारी ने बीते 4 सितम्बर को अपर आयुक्त प्रशासन आलोक वर्मा को मौके पर भेजा था। लेकिन डिजाइन पर कोई सहमति नही बन पाई । आज जिलाधिकारी के आने से डिजाइन बदलने की उम्मीद जगी है। अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द कई बार काशी आए थे। वे पहली बार 1887 में 24 वर्ष की अवस्था में काशी आए थे । काशी प्रवास में वे गोलघर स्थित दामोदरदास की धर्मशाला में ठहरे थे। स्वामी विवेकानंद कुल पाँच बार काशी आए थे। अंतिम बार उन्होंने अपने मृत्यु से चार महीने पूर्व काशी की यात्रा की थी। उस दौरान वे काफ़ी बीमार थे और अर्दली बाज़ार स्थित गोपाललाल विला में रुके थे। यहीं स्वास्थ्य लाभ लेने के दौरान 14 मार्च 1902 को यहाँ से बहन निवेदिता को पत्र लिखा था । पत्र में लिखा कि मुझे साँस लेने में काफ़ी तक़लीफ़ है। यहाँ आम —अमरूद की बड़े —बड़े पेड़ हैं । गुलाब का ख़ूबसूरत बग़ीचा है। तालाब में सुंदर कमल खिले रहते हैं। ये जगह मेरे स्वास्थ्य के लिए उत्तम है । यहाँ से कुछ दूरी पर भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ भी है। यहीं से स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद वे बेलूर मठ अंतिम बार पहुँचे और 4 जुलाई 1902 को उनका देहावसान हो गया । आज गोपाल लाल विला खंडहर में तब्दील हो गया है । इस स्थान को सरंक्षित करने की दिशा में अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान संरक्षण समिति के पदाधिकारियों के साथ एलटी कालेज की प्राचार्य ऋचा जोशी ,एसीएम तृतीय, पुरातत्व विभाग के अफसर भी मौजूद रहे।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

