(रिपीट) भारत में चीन के राजदूत ने बनारस की सुबह, गंगा आरती और नौका विहार के अनुभव किए साझा
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—राजदूत जू फेइहोंग नेसोशल मीडिया पर शेयर की भावनात्मक पोस्ट
वाराणसी, 05 मई (हि.स.)। भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने धर्म नगरी काशी के अपने आध्यात्मिक अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा कर भारत-चीन के सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया है। उनके साझा की गईं तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हाे रही है।
राजदूत फेइहाेंग ने अपने साेशल मीडिया अकाउंट पर मंगलवार काे एक पाेस्ट कर गंगातट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का विहंगम नजारा, गंगा में नौका विहार और सायंकालीन गंगाआरती के मनोहारी दृश्यों का उल्लेख करते हुए काशी की आध्यात्मिक गरिमा की सराहना की। उन्होंने घाटों की जीवंतता, श्रद्धालुओं की आस्था और गंगा तट की अलौकिक छटा को विशेष रूप से रेखांकित किया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “वाराणसी में गंगा नदी पर सूर्योदय। एक नाव धीरे-धीरे बह रही है। धुंध को चीरते हुए सूरज उग रहा है। घाट जाग उठे हैं। चीन और भारत दोनों महान नदियों के किनारे बसे हैं—गंगा और यांग्त्ज़ी ने हमें अलग-अलग रूप में आकार दिया, लेकिन दोनों हमें श्रद्धा, निरंतरता और समुदाय की एक ही सच्चाई तक ले जाती हैं।
इससे पहले राजदूत ने साेमवार की शाम काे दशाश्वमेध घाट पर नियमित होने वाली गंगा आरती की फाेटाे पाेस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि हजारों श्रद्धालुओं के बीच अग्नि, मंत्रोच्चार, पुष्प और पवित्र गंगा का दृश्य अत्यंत अलौकिक अनुभव था। उन्होंने कहा कि काशी में खड़े होकर उन्हें हिमालय के दोनों ओर मौजूद दुनिया की दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का एहसास हुआ।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी उन्होंने ऐतिहासिक सारनाथ की यात्रा के दौरान तस्वीरें साझा कर बौद्ध विरासत को भारत-चीन के ऐतिहासिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया था।
हिन्दुस्थान समाचार

